May २१, २०२४ १९:३६ Asia/Kolkata
  • राष्ट्रपति रईसी की शहादत पर इस्राईली मीडिया क्या प्रोपैगंडा कर रहा है?

ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी की शहादत की ख़बर ने ईरान के लोगों को जहां एकजुट कर दिया, वहीं हमेशा की तरह इस्राईल से जुड़े मीडिया और संगठनों ने इस घटना को लोगों के बीच फूट डालने के इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

ज़ायोनी मीडिया के इस सिनारियो को इस तरह से ख़ुलासा किया जा सकता हैः

  1. झूठी ताक़त का प्रदर्शन

जिस दिन राष्ट्रपति रईसी और उनके साथियों का हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन हुआ, उस दिन ज़ायोनी अधिकारियों में इस बारे में औपचारिक तौर पर एक लफ़्ज़ भी बोलने का साहस नहीं था, लेकिन दूसरी तरफ़ इस्राईल के पैसे से चलने वाले और इस्राईल के मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा कुछ अज्ञात अकाउंट्स ने इस हादसे में इस्राईल की भूमिका को प्रचार शुरू कर दिया।

  1. फूट डालने का प्रयास

ईरानी राष्ट्रपति की शहादत की ख़बर ने जहां लोगों में एकजुटता पैदा की, वहीं तुरंत ही इस्राईल के मनोवैज्ञानिक युद्ध की मशीनरी भी सक्रीय हो गई और उसने लोगों के बीच फूट डालने का काम शुरू कर दिया। मीडिया सिनारियो के ज़रिए ईरान में विभिन्न समुदायों के बीच फूट डालने की कोशिश शुरू कर दी गई। इन अकाउंट्स की अगर जांच-पड़ताल की जाएगी तो उनके तार ज़ायोनी गुटों से जाकर मिलेंगे।

  1. पड़ोसियों के साथ टकराव पैद करने की साज़िश

पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध, राष्ट्रपति रईसी की सरकार की मुख्य नीति थी, इस संदर्भ में उनकी सरकार ने अच्छी कामयाबी भी हासिल की थी। आज़रबाइजान के साथ ईरान के रिश्तों में गर्मजोशी और रविवार को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के हाथों सीमावर्ती बांध का उद्घाटन, इस नीति का ही हिस्सा था। लेकिन इस्राईली मीडिया ने इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच मतभेद उत्पन्न करने की साज़िश रचनी शुरू कर दी।

  1. झूठ की बमबारी से जनमत को भटकाना

सोमवार की सुबह ट्विटर पर मोसाद से संबंधित होने का दावा करने वाले एक अकाउंट से यह झूठा दावा किया गया किईरान के पुलिस प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद रज़ा रादान की हत्या कर दी गई है। इस तरह के हालात में अफ़वाहें फैलाकर समाज में बेचैनी पैदा करने की यह बहुत घिसीपिटी रणनीतिक है।

  1. ईरान में बेनज़ीर एकजुटता के बावजूद, अराजकता फैलाना

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने पिछले 45 साल के दौरान इस तरह के या इससे भी भयावह कई हादसों का अनुभव किया है। क्रांति की सफलता के शुरूआती दौर में ईरान के चीफ़ जस्टिस आयतुल्लाह शहीद बहिश्ती और उसके तुरंत बाद शहीद रजाई और शहीद बाहुनर को शहीद कर दिया गया। इसके बावजूद, ईरान ने इस तरह के हालात का पूरे साहस के साथ मुक़ाबला किया। हालांकि राष्ट्रपति रईसी के साथ पेश आने वाले हादसे के बाद से ही इस्राईली प्रोपैगंडा मशीन ने यह प्रोपैगंडा करना शुरू कर दिया कि ईरान एक बड़े संकट में फंस चुका है।

  1. चुनाव के बजाए हंगामा

ईरान के संविधान की एक विशेषता यह है कि मुख़्तलिफ़ संवेदनशाली मौक़ों के लिए भी समाधान पेश किए गए हैं। संविधान में उल्लेख किया गया है कि इस तरह के हालात में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आधार पर कैसे नए राष्ट्रपति को चुना जाए। लेकिन इस्राईली मीडिया लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाए, देश में हंगामे और अराजकता में काफ़ी रूची रखता है, जिसके लिए कुछ विरोधी गुटों के बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। msm

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