बनी इस्राईल के महान पैग़म्बर "मूसा कलीमुल्लाह" के बारे में मशहूर ईरानी Director की फ़िल्म
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किस लेटेस्ट ईरानी फ़िल्म का विषय एलाही पैग़म्बर है?
पार्सटुडे- "मूसा कलीमुल्लाह" नाम की एक धार्मिक है जिसे ईरानी Director इब्राहीम हातेमी किया ने बनाया है। इस फ़िल्म में यहूदी धर्म के पैग़म्बर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के जीवन के कुछ भागों को दर्शाया गया है।
"मूसा कलीमुल्लाह" फ़िल्म एक महत्वपूर्ण फ़िल्म है जिसकी ईरान के फ़िल्मी फ़ेस्टिवल फ़ज्र में सराहना व प्रशंसा की गयी और इस फ़िल्म को देखने के लिए उसके समस्त टिकट बिक गये।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार इस फ़िल्म की आरंभिक स्क्रिप्ट फ़रजुल्लाह सलहशूर ने लिखा था पर उनका निधन हो जाने के बाद इस फ़िल्म के डायरेक्टर हातेमी किया ने उसे फ़िर से लिखा और उसे फ़िल्माया।
स्क्रिप्ट का स्रोत आसमानी किताब
"मूसा कलीमुल्लाह" नाम की जो फ़िल्म है उसकी स्क्रिप्ट को लिखने के लिए स्रोत के रूप में पवित्र क़ुरआन से लाभ उठाया गया है। "मूसा कलीमुल्लाह" फ़िल्म में पवित्र क़ुरआन के अलावा यहूदियों की धार्मिक पुस्तक तौरात से भी लाभ उठाया गया है जिसकी वजह से जानकारी की दृष्टि से यह फ़िल्म हालीवुड द्वारा 1956 में बनाई गयी फ़िल्म "दस आदेश" से भी बेहतर व अधिक है।
फ़िल्म की कहानी किस समय व काल की है?
यह संभव है कि फ़िल्म देखने वाले बहुत से लोग धार्मिक शिक्षाओं के कारण हज़रत मूसा की ज़िन्दगी से अवगत हों परंतु उनके जीवन के जिन विवरणों को एतिहासिक स्रोतों का सहारा लेकर बयान किया गया है और इस फ़िल्म में उनका उल्लेख किया गया है उन चीज़ों ने इस फ़िल्म की रोचकता में ध्यान योग्य वृद्धि कर दी है।
इस फ़िल्म की कहानी हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पैदा होने से महीनों पहले मिस्र में फ़िरऔन के महल के निकट एक छोटे से शहर से आरंभ होती है। इस फ़िल्म की कहानी का अधिकांश भाग में यह दिखाया जाता है कि फ़िरऔन एक बच्चे को पैदा होने से रोकने के लिए क्या- क्या करता है और वही बच्चा बनी इस्राईल को समय के अत्याचारी शासक के अत्याचार से मुक्ति दिलाता है।
इस फ़िल्म का अस्ली रोल एक महिला करती है
मरीला ज़ारेई एक ईरानी अभिनेत्री हैं जो हज़रत मूसा की मां का रोल अदा करती हैं। वह मां की ममता की भूमिका बहुत अच्छी तरह निभाती हैं। उनकी भूमिका को देखकर प्राचीन मिस्र में एक महिला की भूमिका की याद आ जाती है। फ़िल्म के दृश्यों को इस तरह से फ़िल्माया गया है कि उन्हें देखकर हज़रत मूसा का काल और उस समय की घटनाओं की याद आ जाती है और देखने वाले को एसा प्रतीत होता है कि मानो वह उसी काल में पहुंच गया है। यह बहुत ही कामयाब व सफ़ल फ़िल्म है। इस फ़िल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़्याति प्राप्त हो गयी है। MM