Dec ०३, २०२३ १५:४० Asia/Kolkata

फ़िलिस्तीन से जुड़ी ताज़ा ख़बरों में ग़ज़्ज़ा पट्टी में फॉस्फोरस बमों से जेबालिया शिविर पर बमबारी और अमेरिका की ओर से ज़ायोनी शासन को नए बम भेजने के मुद्दे शामिल हैं।

यद्यपि येदियेत अहारनोत समाचारपत्र के सैन्य विश्लेषक ने दावा किया है कि ज़ायोनी शासन ने अमेरिका के अनुरोध पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों को विशेष सैन्य अभियानों से बदल दिया है लेकिन अस्थायी युद्धविराम की समाप्ति के शुरुआती घंटों से ही ज़ायोनी शासन के ग़ज़्ज़ा पट्टी के विभिन्न हिस्सों पर, जो पहले से ही खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं, हवाई, ज़मीनी और समुद्री हमलों तेज़ हमलों का निशाना बनाया जा रहा है।

शुक्रवार पहली दिसम्बर के बाद से, जब ज़ायोनी शासन के उल्लंघनों की वजह से अस्थायी युद्धविराम समाप्त हो गया, ग़ज़्ज़ा पट्टी के विभिन्न क्षेत्रों पर इस शासन द्वारा व्यापक ज़मीनी, समुद्री और हवाई हमले किए गए जिसके परिणामस्वरूप दर्जनों लोग हताहत और घायल हो गये।

रविवार सुबह ही ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी के केंद्र में स्थित नुसैरात शिविर में लोगों के घरों पर बमबारी की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने ग़ज़्ज़ा पट्टी की ख़राब स्थिति और ज़ायोनी शासन द्वारा ग़ज़्ज़ा पर जारी लगातार बमबारी के दृष्टिगत इस क्षेत्र में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम ग्रेब्रेसस ने बताया कि इस्राईल की निरंतर बर्बर बमबारी ने ग़ज़्ज़ा को गंभीर स्वास्थ्य और चिकित्सा संकट में डाल दिया है। उनका कहना था कि संकटग्रस्त ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल की भारी बमबारी जारी रहने की रिपोर्टें हासिल हो रही हैं।

दूसरी ओर प्रतिरोधकर्ताओं ने भी जवाबी कार्रवाईयां की हैं और फ़्रंट मोर्चों को बाधित करते हुए अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं।

अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर हमला करने वाले प्रतिरोध के रॉकेट और आयरन डोम की मिसाइलों को रोकने में असमर्थता ने ज़ायोनी अधिकारियों को भ्रमित कर दिया है।

पिछली रात ज़ायोनी सेना ने आयरन डोम की संभावित विफलता और मिसाइलों को रोकने में आयरन डोम की तकनीकी ख़राबी के कारण अवैध अधिकृत क्षेत्रों में एक मिसाइल के दुर्घटनाग्रस्त होने की जांच शुरू करने की बात कही है।

इस्राईल के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की जवाबी कार्रवाइयों की वजह से इस शासन को भारी नुक़सान पहुंचा है और उसने अपने सैनिकों के मारे जाने की सूचना पर सख़्त सेंसरशिप लगा रखा है। (AK)

 

 

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