Feb २५, २०२४ १६:२० Asia/Kolkata

फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों के ख़िलाफ़ हार के परिणामों से बचने के लिए ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने युद्ध के बाद फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की राहत और कार्य एजेंसी "यूएनआरडब्ल्यूए" को भंग करने की योजना, सुरक्षा कैबिनेट के हवाले कर दी है।

ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में युद्ध के बाद के समय के बारे में एक दस्तावेज़ और एक योजना सुरक्षा कैबिनेट को सौंपी है। नेतन्याहू के दस्तावेज़ में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की राहत और कार्य एजेंसी "यूएनआरडब्ल्यूए" को भंग करना और इसके स्थान पर अन्य अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों को जगह देना शामिल है।

इस योजना में ग़ज़्ज़ा पट्टी में ज़ायोनी बस्तियों के आसपास एक सुरक्षा क्षेत्र का निर्माण और मिस्र के साथ ग़ज़्ज़ा की दक्षिणी सीमा को बंद करना भी शामिल है।

ग़ज़्ज़ा के पुनर्निमाण की योजना, नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट की अनुमति से ही होगी यानी इस्राईल, ग़ज़्ज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण की अनुमति तब तक नहीं देगा जब तक कि वह निरस्त्र न हो जाए।

ज़ायोनी शासन द्वारा स्वीकृत देशों के बजट और नेतृत्व के साथ नेतन्याहू की योजना के आधार पर गाजा पुनर्निर्माण योजनाओं को लागू किया जाएगा।

नेतन्याहू की योजना ऐसी स्थिति में प्रस्तुत की गई है कि जब अवैध अधिकृत क्षेत्रों में सड़क पर विरोध प्रदर्शनों का क्रम जारी है और ज़ायोनी कैदियों के परिजन, नेतन्याहू और उनके मंत्रिमंडल पर उनके परिवार के सदस्यों को मुक्त करने में असमर्थ होने का आरोप लगा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी वर्तमान कैबिनेट पर महाभियोग चलाने और नये सिरे से चुनाव कराने की भी मांग कर रहे हैं।

7  अक्टूबर, 2023 को तूफ़ान अल-अक्सा ऑपरेशन की शुरुआत और फिलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी सेना की लगातार हार के बाद से नेतन्याहू की कैबिनेट हताश हो गयी है।

नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों और फिलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन "हमास" पर त्वरित जीत और युद्ध को शीघ्र समाप्त करने तथा ग़ज़्ज़ा पर पूर्ण नियंत्रण का वादा किया था जबकि ज़ायोनियों को फिलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ताओं के खिलाफ युद्ध में लगातार हार का सामना करना पड़ा था और हालिया सप्ताहों में इस शासन के नेताओं ने भी इस बात को स्वीकार किया है।

अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में ज़ायोनी शासन को अमेरिका और पश्चिमी सरकारों के व्यापक समर्थन से इस शासन के अधिकारियों को मदद नहीं मिली, और वैश्विक जनमत के मैदान में, इस्राईल को फ़िलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों की हत्याओं का ज़िम्मेदार माना गया। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने दक्षिण अफ़्रीकी वकीलों की शिकायत पर आयोजित अपनी बैठकों में ग़ज़्ज़ा में ज़ायोनी शासन के अपराधों को नरसंहार क़रार दिया है।

इस योजना की शुरुआत के बाद, फिलिस्तीनी प्रशासन ने युद्ध के बाद ग़ज़्ज़ा के लिए ज़ायोनी प्रधानमंत्री की भ्रामक योजना का भी विरोध किया है। (AK)

 

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