Mar ०३, २०२४ १४:१८ Asia/Kolkata
  • ग़ज़ा में इस्राईल के जघन्य अपराध जारी, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं ख़ामोश

ग़ज़ा पट्टी में हालात बहुत संकटमय हैं और इस्राईल वहां लगातार नरसंहार और जातीय सफ़ाया कर रहा है मगर संयुक्त राष्ट्र संघ और उससे जुड़े संगठन कोई भी प्रभावी क़दम नहीं उठा पा रहे हैं।

सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी करके फ़िलिस्तीनियों की मदद और ग़ज़ा के मूल प्रतिष्ठानों को सुरक्षा के लिए ज़रूरी उपाया किए जाने पर ज़ोर दिया। इस संस्था ने मानवीय सहायता लेने के लिए जमा फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईल के नृशंस हमलों पर बस चिंता जताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

युनिसेफ़ की एग्ज़ेक्टिव मैनेजर कैथ्रीन रासेल ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि ग़ज़ा के बच्चों तक खाने पीने की चीज़ें, और दवाएं पहुंचने में एक मिनट की भी देरी के ख़तरनाक परिणाम होंगे।

संयुक्त राष्ट्र संघ और उससे संबंधित संस्थाओं ने हालिया वर्षों में ग़ज़ा पट्टी में इस्राईली नाकाबंदी की वजह से बेहद असहनीय हालात होने के बावजूद फ़िलिस्तीनियतं की मदद नहीं की बल्कि ज़ायोनी शासन के अपराधों पर ख़ामोश रहीं।

ज़ायोनी शासन अमरीका और यूरोपीय सरकारों के समर्थन से फ़िलिस्तीनियों पर लगातार हमले कर रहा है। इस्राईली अधिकारियों ने यहां तक योजना बना ली कि 7 अक्तूबर के तूफ़ान अलअक़सा आप्रेशन के बाद ग़ज़ा पट्टी के पूरे इलाक़े को फ़िलिस्तीनियों से ख़ाली करा लिया जाए। इस अमानवीय योजना में भी उसे अमरीका और पश्चिमी देशों का समर्थन मिल रहा था। इस्राईल की कोशिश थी कि ग़ज़ा पट्टी की 24 लाख की आबादी को मिस्र और दूसरे देशों में बसाया जाए और ग़ज़ा पट्टी का पूरा इलाक़ा इस्राईल के क़ब्ज़े में चला जाए। इस्राईली अधिकारियों ने इस योजना के लिए बजट का भी अंदाज़ा लगा लिया था।

मगर फ़िलिस्तीनी जनता और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ ने पांच महीने की लड़ाई में इस्राईल ही नहीं पूरी दुनिया को अच्छी तरह यक़ीन दिला दिया है कि उनकी धरती को उनसे ख़ाली नहीं कराया जा सकता।

जिन फ़िलिस्तीनियों के घर ज़ायोनी सेना की भीषण बमबारी में ध्वस्त हो चुके हैं वे पलायन करके किसी और देश में जाने पर अपने घर के मलबे के पास टेंट लगाकर जीवन गुज़ारने को तरजीह दे रहे हैं।

फ़िलिस्तीनियों के इस प्रतिरोध ने एक तरफ़ ज़ायोनी शासन की योजना पर पानी फेर दिया और दूसरी तरफ़ सारी दुनिया में इस्राईल को बेनक़ाब कर दिया कि यह कितना अमानवीय और क्रूर शासन है। इस्राईली अधिकारियों की कुकर्म इतने भयानक हैं कि पश्चिमी देशों में उनके समर्थक भी उनका बचाव नहीं कर पा रहे हैं। आम जनता की नज़र में इस्राईल इस समय एक क़ातिल और विनाशकारी के रूप में देखा जा रहा है और अपनी मज़लूमियत को जो प्रोपैगंडा ज़ायोनियों ने कई दशकों से कर रखा था उसका असर ख़त्म होत जा रहा है।

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए 

फेसबुक पर हमारे पेज को लाइक करें।  

टैग्स