इन दिनों ईश्वर अपने बंदों को माफ़ करने के लिए बहाना ढूंढ रहा है
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ईरान के पवित्र नगर क़ुम स्थित धार्मिक शिक्षा केन्द्र के नैतिकता के प्रोफेसर हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन "मुर्तुज़ा आग़ातेहरानी"
पार्स टुडे- ईरान के पवित्र नगर क़ुम स्थित धार्मिक शिक्षा केन्द्र में नैतिकता के प्रोफेसर ने कहा: ईश्वर सदैव अपने बंदों को क्षमा करने के लिए बहाना ढूंढ रहा है और छिपी हुई नेअमतों तथा टली हुई बलाओं पर ध्यान देना, इंसान के जीवन और ईश्वरीय दया के प्रति दृष्टिकोण को बदल सकता है।
पार्स टुडे के अनुसार हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन "मुर्तुज़ा आग़ा तेहरानी" ईरान के पवित्र नगर क़ुम स्थित धार्मिक शिक्षा केन्द्र में नैतिकता के प्रोफेसर ने मंगलवार को जमकरान की पवित्र मस्जिद में रमज़ान महीने की सुबह-सवेरे आयोजित आध्यात्मिक सभा में कहा: प्रार्थनाओं में पैगंबर-ए-इस्लाम के अहल-ए-बैत के शैक्षणिक तरीकों में से एक यह है कि वे पहले हमें ईश्वर को उसके गुणों के साथ पहचनवाते हैं ताकि हम उसे सही रूप से जान सकें और फिर उसी पहचान के आधार पर हम उससे अपेक्षा रखें।
आग़ा तेहरानी ने कहा: जब इंसान यह विश्वास कर लेता है कि ईश्वर करीम और मेहरबान है तो स्वाभाविक रूप से वह उम्मीद करता है कि उसके साथ दया और बड़प्पन से पेश आया जाए और यदि वह इसके विपरीत कुछ देखता है तो उसे आश्चर्य होता है।
उन्होंने आगे कहा: यदि इंसान अपने जीवन पर एक नज़र डाले तो वह देखेगा कि वह कितनी समस्याओं और विपदाओं जैसे बीमारियों, बेइज़्ज़ती और बड़ी कठिनाइयों से सुरक्षित रहा है, ये सब ईश्वर की निरंतर कृपा का संकेत है कि जब हम फिसल जाते हैं यानी गलती कर बैठते हैं तब भी वह हमें अकेला नहीं छोड़ता।
उन्होंने दुआये इफ्तिताह के एक भाग की ओर इशारा करते हुए जिसमें कहा गया है कि तूने मेरी लड़खड़ाहट को नज़रअंदाज कर दिया। यह वाक्य दर्शाता है कि ईश्वर ने हमारी कितनी गलतियों और त्रुटियों को नजरअंदाज कर दिया है और उनके प्रभाव को समाप्त कर दिया है जबकि यदि वह हमारे साथ पूर्ण न्याय से पेश आता तो कोई भी अपने कर्मों के परिणामों को सहन करने की क्षमता नहीं रखता।
ईरान के पवित्र नगर क़ुम स्थित धार्मिक शिक्षा केन्द्र में नैतिकता के प्रोफेसर ने जोर देकर कहा: ईश्वर न केवल पापों को क्षमा करता है बल्कि अपनी दया को लोगों के बीच फैलाता है और अपने बंदों की इज़्ज़त व सम्मान की रक्षा करता है। यहां तक कि कभी-कभी दूसरे हमें उससे बेहतर देखते हैं जैसे हम वास्तव में हैं यह भी ईश्वर की दया का एक रूप है।
उन्होंने इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि हम पर आने से पहले ही कई विपदाएं हमसे दूर कर दी जाती हैं, कहा: इस सत्य पर ध्यान देना इंसान को यह समझाता है कि ईश्वर हमें दंडित करने के बजाय, हमें क्षमा करने के लिए बहाना ढूंढ रहा है। यह पहचान ईश्वर के प्रति हमारी आशा और विश्वास को और बढ़ा देती है। mm