अंसारुल्लाह: "शहीद नेता का करोड़ों की संख्या में जनाज़ा, प्रतिरोध के दुश्मनों का समीकरण बिगड़ गया"
पार्स टुडे – यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य ने शहीद नेता के जनाजे में ईरानी लोगों की व्यापक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए इस उपस्थिति को रणनीतिक और राजनीतिक संदेशों से भरा हुआ बताया और कहा: "ईरानी लोगों की भारी भागीदारी ने उनकी हत्या के बाद प्रतिरोध के समर्थन को समाप्त करने के लिए अमेरिका और इज़राइली शासन की गणनाओं को बिगाड़ दिया।"
पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अल-मसीरा टेलीविजन नेटवर्क के हवाले से 'मोहम्मद अल-फ़राह' ने एक संदेश में घोषणा किया कि ईरानी लोगों की शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के जनाजे में लाखों की उपस्थिति ने, इस्लामिक गणराज्य के प्रति जन समर्थन की सीमा को प्रदर्शित किया और अमेरिका और ज़ायोनी शासन की, उनकी हत्या के बाद व्यवस्था को ध्वस्त करने या आंतरिक मोर्चे में दरार पैदा करने की योजना को विफल कर दिया।
यह कहते हुए कि जनाजा, एक ऐतिहासिक नेता की विदाई समारोह से परे था, उन्होंने आगे कहा:
"यह व्यापक उपस्थिति इस्लामी क्रांति, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय संप्रभुता और अमेरिकी तथा ज़ायोनी शासन के वर्चस्व का मुकाबला करने के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में एक जनमत संग्रह में बदल गई और दिखाया कि शहीद नेता द्वारा अपनाया गया मार्ग, ईरानी समाज में मजबूत जन और संस्थागत समर्थन रखता है।
अल-फ़राह ने कहा कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन का मानना था कि क्रांति के नेता को निशाना बनाकर उनकी हत्या करने से एक राजनीतिक शून्यता, आंतरिक संघर्ष और इस्लामिक गणराज्य की संरचना के कमजोर होने के साथ-साथ ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने और प्रतिरोध पक्ष का समर्थन समाप्त करने जैसे वाशिंगटन और तेल अवीव के उद्देश्यों को प्राप्त करने का आधार तैयार होगा, लेकिन जनाजे में लोगों की व्यापक उपस्थिति ने इन गणनाओं को विफल कर दिया।
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य ने यह भी जोर देकर कहा कि "ईरानी लोगों की यह उपस्थिति दिखाती है कि इस्लामिक गणराज्य, स्थापित संस्थानों और देश के शासन तथा जिम्मेदारी के हस्तांतरण के निर्धारित तंत्रों पर आधारित है और नेताओं की हत्या दुश्मनों के उद्देश्यों को प्राप्त करने का कोई रास्ता नहीं हो सकती।"
उन्होंने जनाजे के सबसे महत्वपूर्ण संदेशों में से एक को शहीद नेता के आदर्शों के प्रति ईरानी लोगों की प्रतिबद्धता और अमेरिकी तथा ज़ायोनी शासन के दबावों के खिलाफ प्रतिरोध का मार्ग जारी रखना बताया और कहा:
"लोगों ने अपनी उपस्थिति के साथ देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय संप्रभुता और इस दृष्टिकोण की निरंतरता के समर्थन पर जोर दिया।"
अल-फ़राह ने इस समारोह के आंतरिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा:
"लोगों की व्यापक उपस्थिति ने राष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत किया और दिखाया कि ईरान के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक धाराएँ, देश की रक्षा और बाहरी खतरों का मुकाबला करने में एकमत हैं।"
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य ने इस घटना को क्षेत्रीय प्रभावों वाली बताते हुए कहा:
"इस उपस्थिति ने अमेरिका और ज़ायोनी शासन को एक निवारक संदेश भेजा कि ईरान के साथ कोई भी टकराव व्यापक सार्वजनिक प्रतिक्रिया का सामना करेगा और यही बात किसी भी सैन्य कार्रवाई या आंतरिक अस्थिरता पैदा करने के प्रयास की लागत को बढ़ाती है।" mm