विश्लेषण | क्या आगामी इज़राइली चुनाव नेतन्याहू के युग के अंत का कारण बनेंगे?
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पार्स टुडे – ज़ायोनी शासन के संसदीय चुनावों में दो महीने से भी कम समय शेष है, और जनमत सर्वेक्षण बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड पार्टी और उसके अति-दक्षिणपंथी गठबंधन की सीटों में गिरावट का संकेत देते हैं।
(last modified 2026-09-01T12:56:23+00:00 )
Sep ०१, २०२६ १८:२३ Asia/Kolkata
  • ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
    ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

पार्स टुडे – ज़ायोनी शासन के संसदीय चुनावों में दो महीने से भी कम समय शेष है, और जनमत सर्वेक्षण बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड पार्टी और उसके अति-दक्षिणपंथी गठबंधन की सीटों में गिरावट का संकेत देते हैं।

इज़राइल का 26वां संसदीय चुनाव 27 अक्टूबर को होने वाला है। हाल के महीनों में प्रकाशित सर्वेक्षण बताते हैं कि प्रधानमंत्री पद के लिए फिर से चुने जाने के मामले में नेतन्याहू की स्थिति अस्थिर है। सर्वेक्षणों के अनुसार, नेतन्याहू का गठबंधन 20 सीटों तक खो सकता है, और उसके पास कैबिनेट बनाने के लिए आवश्यक सीटें नहीं हो सकती हैं। वर्तमान में नेतन्याहू के गठबंधन के पास 120 सदस्यीय संसद में 68 सीटें हैं। सर्वेक्षणों के अनुसार, यह गठबंधन 49 से 53 सीटों के बीच हासिल कर सकता है। इसके विपरीत, विपक्षी दलों के पास 67 से 70 सीटें जीतने की संभावना है। कैबिनेट बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की आवश्यकता होती है ।

 नेतन्याहू के खिलाफ प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ

आगामी चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य है। नेतन्याहू, जो 1996 से 1999 तक प्रधानमंत्री रहे, 2009 में फिर से सत्ता में आए और पिछले 17 वर्षों में केवल 18 महीने ही सत्ता से बाहर रहे। इस प्रकार, वे कब्जे वाले क्षेत्रों में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं ।

उनके राजनीतिक विरोधी, जो पिछली अवधि में विशेष रूप से 2019 से 2022 के बीच उन्हें हराने के लिए दृढ़ थे, पिछले तीन वर्षों के घटनाक्रमों के कारण आगामी चुनाव में भी उन्हें हराने का प्रयास कर रहे हैं। नेतन्याहू के खिलाफ विपक्ष द्वारा उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं:

2023 में "तूफान-ए-अक़्सा" ऑपरेशन और इस ऑपरेशन में इज़राइल की खुफिया विफलता।

फ़लस्तीन में हमास और लेबनान में हिज़्बुल्लाह को नष्ट करने में विफलता।

ईरान के खिलाफ युद्ध में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफलता ।

जबकि नेतन्याहू ने ईरान और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उपलब्धियों को उजागर करके दक्षिणपंथी समर्थन बनाए रखने की कोशिश की है, युद्धों की आर्थिक और मानवीय लागत ने जनता की थकान को बढ़ा दिया है। उनके प्रतिद्वंद्वी उन पर 2023 के हमास के आश्चर्यजनक हमले को रोकने में असमर्थ होने और यह कहने का आरोप लगाते हैं कि सैन्य अभियान लंबा खिंच गया है और अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुँचा है ।

 गाडी आइजेनकोट: प्रमुख प्रतिद्वंद्वी

प्रधानमंत्री पद के लिए नेतन्याहू के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्वी गाडी आइजेनकोट हैं, जो इज़राइली सेना के पूर्व प्रमुख हैं, और अधिकांश सर्वेक्षणों में उनकी स्थिति बेहतर है। आइजेनकोट ने पिछले साल सितंबर में मध्यमार्गी पार्टी "यशर" की स्थापना की थी। विश्लेषकों का मानना है कि यशर का उदय नेतन्याहू से बढ़ती निराशा के कारण हुआ है।

आइजेनकोट ने अपने चुनावी अभियान में नेतन्याहू की आलोचना करते हुए कहा: "जो बात मुझे परेशान करती है, वह यह है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुद को सर्वोच्च कमांडर के रूप में चित्रित करते हैं, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं कहा कि 'मैं 2023 की विफलता की जिम्मेदारी स्वीकार करता हूँ।'" 

सर्वेक्षणों के अनुसार, यशर पार्टी को 25 सीटें मिल सकती हैं, जबकि लिकुड को 20 और नफ़्ताली बेनेट की पार्टी बी'याचद को 15 सीटें मिल सकती हैं। प्रधानमंत्री की उपयुक्तता के सवाल पर, आइजेनकोट नेतन्याहू से 48% बनाम 37% से आगे हैं ।

 नेतन्याहू की रणनीति: भय और अस्तित्व की लड़ाई

नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने डर की राजनीति का सहारा ले रहे हैं। वह कब्जे वाले क्षेत्रों के नागरिकों को अपनी संभावित हार के परिणामों से डराते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वह आगामी चुनाव नहीं जीतते हैं, तो यह इज़राइल के अंत की शुरुआत होगी। नेतन्याहू ने दावा किया: "यदि मेरे प्रतिद्वंद्वी जीत जाते हैं, तो वे लेबनान, ग़ज़ा और सीरिया से पीछे हट जाएंगे, और यहाँ एक फ़लस्तीनी राज्य स्थापित करेंगे... और यह इज़राइल के अंत की शुरुआत होगी। हम एक मुक्त पतन में प्रवेश करेंगे।" 

एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप से आगामी चुनाव में नेतन्याहू के समर्थन के बारे में चिंतित हैं । इस संबंध में, आइजेनकोट, नफ़्ताली बेनेट और याइर लापिड ने ट्रंप और उनके सहायकों को अपने समर्थन की घोषणा न करने का अनुरोध करने के लिए अप्रत्यक्ष संदेश भेजे हैं ।

निष्कर्ष

अंतिम बिंदु यह है कि नेतन्याहू का प्रयास है कि या तो वह नई कैबिनेट बनाने के लिए पर्याप्त वोट प्राप्त करें, या फिर इतने वोट हासिल करें कि उनके विरोधी भी सरकार नहीं बना सकें। इस स्थिति में, नेतन्याहू अगले चुनाव तक अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में बने रहेंगे; यह स्थिति 2019 और 2020 में भी देखी गई थी । (AK)

 

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