"सुरक्षा परिषद: इज़राइल के लेबनान पर हमलों का कोई औचित्य नहीं है, इसे तुरंत रोका जाए।"
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पार्स टुडे – लेबनान पर इज़राइली शासन के हमलों के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, जिन्होंने हमलों को रोकने और इस शासन को लेबनानी क्षेत्र से वापस बुलाने की मांग की।
(last modified 2026-06-02T13:52:34+00:00 )
Jun ०२, २०२६ १९:२० Asia/Kolkata
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

पार्स टुडे – लेबनान पर इज़राइली शासन के हमलों के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, जिन्होंने हमलों को रोकने और इस शासन को लेबनानी क्षेत्र से वापस बुलाने की मांग की।

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में लेबनान के प्रतिनिधि 'अहमद अर्क़ा' ने घोषणा की कि इज़राइली शासन ने दक्षिणी लेबनान में बुनियादी ढांचे और आवासीय घरों को बड़े पैमाने पर नष्ट करके लेबनानी नागरिकों को भारी पीड़ा, आतंक और क्षति पहुँचाई है।

 

लेबनान के प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि दण्ड से मुक्ति अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनकर्ताओं को अपने अपराधों को दोहराने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि इज़राइल के वास्तविक उद्देश्यों को इस शासन के अधिकारियों के बयानों में पाया जा सकता है, जो सैन्य अभियानों के दायरे का विस्तार करने और लेबनान के अधिक हिस्सों पर कब्जा करने पर जोर दे रहे हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत और प्रतिनिधि 'फू काँग' ने भी बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लेबनान की स्थिति और खराब होने से पहले तत्काल और प्रभावी कार्रवाई को अपनी प्राथमिकता बनानी चाहिए। सुरक्षा परिषद में चीनी प्रतिनिधि ने लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेनाओं की पूर्ण वापसी का आह्वान किया और कहा: "बीजिंग तनाव कम करने, शांति बहाल करने और क्षेत्र में स्थिरता मजबूत करने के लिए सभी पक्षों के साथ सहयोग करने और इस प्रक्रिया में मदद करने के लिए तैयार है।"

 

संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत और प्रतिनिधि 'वासिली नेबेंज़िया' ने सुरक्षा परिषद की बैठक में अपने संबोधन में कहा: "लेबनान में स्थिति की गिरावट, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के ईरान के खिलाफ अकारण आक्रमण का प्रत्यक्ष परिणाम है।"

 

सुरक्षा परिषद में रूसी प्रतिनिधि ने चेतावनी देते हुए कहा कि "लेबनान में गाजा जैसा परिदृश्य घटित हो रहा है" उन्होंने कहा: "17 अप्रैल को लेबनान और इज़राइल के बीच वाशिंगटन की मध्यस्थता से स्थापित संघर्ष विराम, दुर्भाग्य से 'लेबनान के खिलाफ इज़राइल की आक्रामक कार्रवाइयों को छिपाने के लिए एक पर्दा' बन गया है।"

 

सुरक्षा परिषद में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि 'जेरोम बोनाफोंट' ने भी जोर देकर कहा: "लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियानों की निरंतरता और विस्तार को कोई भी चीज़ उचित नहीं ठहरा सकती है।" ये अभियान हजारों नागरिकों की मौत और घायल होने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर विस्थापन और लेबनानी क्षेत्र के और गहरे कब्जे का कारण बने हैं। mm