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क्या बिन सलमान ने टेक दिये घुटने? ईरान की बढ़ती ताक़त और मध्य पूर्व में बदलते समीकरण ... अतवान का धमाकेदार लेख ...
Oct ०७, २०१९ १३:२४सऊदी अरब के उप रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान और अंसारुल्लाह की राजनीतिक परिषद के प्रमुख सैयद मेहदी मश्शात के बीच निंरतर संपर्क की खबरों के सही या गलत होने पर ध्यान न भी दें तब भी यह साफ है कि सऊदी अरब, यमन में युद्ध जारी रखने की ताक़त नहीं रखता इस लिए यमन की ज़मीन पर पैर जमाए हमलों का डट कर मुक़ाबला करने वाले दुश्मन से बात चीत ही, सऊदी अरब को इस खर्चीले दलदल से निकालने का एकमात्र रास्ता है।
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एनआरसी पर मोदी जब बांग्लादेश को आश्वासन दे रहे हैं तो फिर इसके पीछे असली मक़सद क्या है?
Oct ०७, २०१९ ०८:३०बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान शनिवार को सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
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मोसाद की ख़ौफ़नाक किशोरियां और उनके भयानक मिशन, इराक़ी परमाणु वैज्ञानिक की हत्या के विषय पर क्यों बात नहीं करना चाहतीं लिवनी? आज हसरत से हाथ क्यों मल रही हैं मोसाद जैसी एजेंसियां?
Oct ०७, २०१९ ०५:५९नासेरा, फ़िलिस्तीन से ज़ुहैर अंद्रओस की रिपोर्टः इस्राईल में ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद को एक पवित्र संस्था के रूप में देखा जाता है जिसके बारे में किसी को कोई बात करने का अधिकार नहीं है।
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नई डगर पर सऊदी अरब, पहले बुर्क़े की शर्त हटाई और अब अविवाहित जोड़ों को होटल में कमरा देने का रास्ता किया साफ़!
Oct ०६, २०१९ १३:५०इस्लामी देश सऊदी अरब ने सितम्बर महीने में आम पर्यटन की घोषणा करते हुए विदेशी महिलाओं को विशेष बुर्क़ा पहनने की शर्त से आज़ाद कर दिया था जो सऊदी अरब में महिलाएं पहनती हैं अब सऊदी अरब ने कहा है कि विदेश पर्यटकों को अब और सुविधाएं दी जाएंगी।
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क्या इराक़ में हंगामे, आरामको पर हमले का सऊदी- अमरीकी बदला हैं? फिलिस्तीनी विश्लेषक के विचार और अहम सवाल, पढ़ें...
Oct ०६, २०१९ १०:२७यह बिल्कुल सही बात है कि इराक़ी जनता जिन समस्याओं का सामना कर रही है वह इस देश के संसाधनों पर ध्यान देने के बाद आश्चर्यजनक है। इन संसाधनों अलावा स्वंय इराक़ी जनता भी काफी योग्य और सक्षम है लेकिन इन सब के बावजूद दशकों से इराक़ी जनता सुख सुविधा से दूर है इस लिए इस की मांग करना और सड़कों पर निकलना उनका अधिकार है लेकिन आज कल जो कुछ इराक़ में हो रहा है उसे पूरी तरह इन चीज़ों का परिणाम नहीं कहा जा सकता है और इसके कई कारण हैं।
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न डरने वाले से डरती है दुनियाः इस्राईल को ईरान की ओर से बड़े हमले का खतरा, तेलअबीव में खलबली... कैसे घिरे संकट में ईरान के तीन बड़े विरोधी?
Oct ०६, २०१९ ०६:२६इसराईली मीडिया में अब यह कहा जा रहा है कि हालिया वर्षों में ईरान के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले दुनिया के तीन बड़े नेताओं की हालत पिछले हफ्ते खराब रही और हरेक को भीतरी संकटों का सामना है।
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तुर्की और अमरीका एक बार फिर आमने सामने, रविवार को छिड़ सकती है बड़ी लड़ाई, सीरिया को बांटने का ख़्वाब देखने वाले अब डरावना सपना देख रहे हैं!
Oct ०६, २०१९ ०६:१२सीरिया को कई भागों में बांट देने के लिए इस देश के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय देशों और अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों ने भयानक साज़िश रची थी जिस पर अमल 2011 से शुरू किया गया मगर वह साज़िश नाकाम हो गई तो आज हालत यह है कि साज़िशकर्ता ताक़तें आपस में भिड़ गई हैं।
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इराक़ में हिंसा और हंगामे की असली वजह क्या है?
Oct ०५, २०१९ १२:१६इराक़ी राजधानी बग़दाद समेत कई अन्य शहरों में अचानक हिंसक प्रदर्शनों के फूट पड़ने और अब तक 73 लोगों की जान चली जाने से हर कोई हैरान है और भ्रष्टाचार के विरोध के नाम पर शुरू हुए इस विद्रोह की असली वजह जानना चाहता है।
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हॉट समर, भयानक साज़िश, ईरान को धमकी और ... यहां समझें क्या हो रहा है इराक़ में ... बगदाद की चार सूत्रीय योजना क्या है?
Oct ०४, २०१९ १२:४५इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इराक़ में जनता प्रदर्शन करके, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए जाने और रोज़गार पैदा करने की मांग कर रही है उस पर गंभीरता के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए लेकिन बगदाद और दक्षिणी प्रांतों में आज कल जो हो रहा है, वह दरअस्ल इराक़ की जनता की मांगों के रूप में अमरीकी योजना को लागू करना है और इराक़ी सरकार को भी इसकी जानकारी है और इसी लिए वह इस साज़िश को नाकाम बनाने के लिए चार रास्तों से काम शुरु कर चुकी है।
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क्यों कहा अमरीका ने कि शिया हिलाल, चौदहवीं का चांद बन गया? जानें इस " शिया चांद " की पूरी कहानी
Oct ०३, २०१९ १४:२८क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव से चिंतित, अमरीका और उसके घटकों ने " शिया हिलाल " या " Shia crescent" का प्रचार करके इलाक़े में नये झगड़े को जनम देने का प्रयास किया है। वास्तव में अज़रबेजान, ईरान, इराक़, बहरैन तथा लेबनान आदि क्षेत्रीय देशों में शिया बहुसंख्यक हैं जिनके मध्य सहयोग और संबंध को अमरीका और उसके क्षेत्रीय घटक एक खतरे के रूप में देखते हैं। नक्शे पर यदि इन देशों के नामों पर एक लीकर खींची जाए तो वह बारीक चांद की तरह नज़र आता है जिसे अरबी में " हिलाल " कहा जाता।