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“न्यायपालिका की स्वतंत्रता ‘बेहद ख़तरे’ में है” आख़िर भारतीय न्यायपालिका को क्यों और किससे है ख़तरा?
Apr २२, २०१९ १०:४८भारतीय सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत के 22 जजों को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में उनका यौन उत्पीड़न किया था। इस आरोप के बाद पूरे भारत में हड़कंप मच गया।
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जमकरान मस्जिद में पंद्रह शाबान का जश्न
Apr २२, २०१९ ०८:५६जमकरान मस्जिद में पंद्रह शाबान का जश्न
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तो क्या अब भारत में शहीदों का अपमान करने वाले देश भक्त कहलाएंगे? साध्वी की जगह मौलवी होता तो क्या होता?
Apr २१, २०१९ १५:२९भारत में इस समय बह रही चुनावी नदी को भी गंगा की तरह कुछ तथाकथित राष्ट्रवादी और देश भक्तों ने गंदा कर दिया है। भारत के इतिहास में 2019 का चुनाव हमेशा याद रखा जाएगा लेकिन अच्छाई के लिए नहीं बल्कि इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व को कलंकित करने के कारण।
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मुसलमान क़ैदी की पीठ पर गर्म लोहे से बनाया गया ओम का निशान, बुज़ुर्ग मुसलमान को मार मार कर खिलाया सूअर का मांस, यह कैसे संदेश हैं?
Apr २०, २०१९ १६:२४भारत की राजधानी नई दिल्ली में तिहाड़ जेल में जो घटना घटी है वह इस बात को सच साबित करने के लिए पर्याप्त सुबूत है कि अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाले समूहों ने हर स्तर पर काम किया है।
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क्या ईरान की मध्यस्थता तुर्की और सीरिया को एक दूसरे के क़रीब लाएगी? जवाद ज़रीफ़ अर्दोगान के लिए असद का क्या संदेश लेकर अंकारा पहुंचे?
Apr २०, २०१९ १३:५१ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने तुर्की का तीन दिवसीय दौरा किया। इसका महत्व दो महत्वपूर्ण कारणों से है।
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हमें नोटरे डम चर्च में लगी आग पर गहरा दुख है मगर इसके कारण कुछ और हैं! लेकिन क्या यह उस चर्च आफ़ नेटिविटी से अधिक पवित्र चर्च है जहां पादरी और ननों को मारा गया?
Apr २०, २०१९ १२:०५पेरिस का नोटरे डम चर्च मैंने कई बार देखा है। इसकी वास्तुकला और इसके अदभुत टावर देखकर बड़ा सुखद अचरज होता है।
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भारतः चुनाव के दौरान बेरोज़गारी की रिपोर्ट क्या सत्ताधारी पार्टी को नुक़सान पहुंचाएगी?
Apr १७, २०१९ १६:०८भारत में दो साल के भीतर 50 लाख पुरुषों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा। यह ख़बर वैसे तो पूरे भारत के लिए चिंता का विषय है लेकिन सबसे ज़्यादा चिंता सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को होगी क्योंकि यह चुनाव का समय है और मोदी सरकार की साख दांव पर लगी हुई है।
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उसमानी साम्राज्य 5 सौ साल, ब्रिटिश साम्राज्य उससे कम, और सोवियत संघ 70 साल चल पाया जबकि अब अमरीका बिखराव के क़रीब पहुंच चुका है!
Apr १७, २०१९ १५:२५सलतनते उसमानिया 5 शताब्दियों तक चली, ब्रिटिश साम्राज्य इससे कुछ कम चला। औद्योगिक और सूचना की क्रान्ति आने के बाद सब कुछ बदल गया और हालात में एक नई गति पैदा हो गई।
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क्या सैनिक बग़ावतों की ताक़त सीमित हो गई, अलजीरिया और सूडान के जनान्दोलनों में क्या ज़ोर नज़र आया कि डर गई हैं सेनाएं?
Apr १७, २०१९ १४:२९ज़माना बदल गया है, सैनिक विद्रोह हो रहे हैं, उनकी ख़बरें भी आ रही हैं लेकिन उनमें पहले वाली बात नहीं रह गई है।
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अब भारत के युवा ही तय करें कि उन्हें विकास चाहिए या विनाश
Apr १७, २०१९ ११:५२भारत में आम चुनाव अपने दूसरे चरण में पहुंच गए हैं। राजनीतिक पार्टियां धीरे-धीरे और अधिक एक दूसरे पर हमलावर होती जा रही हैं। सबसे अहम बात यह है कि पार्टियां अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रही हैं और इस लड़ाई में देश की जनता के मुद्दे बहुत दूर छूटते जा रहे हैं।