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ग़ज़ा को ख़ाली कराने की योजना के जवाब में मिस्री राष्ट्रपति ने रखा नया प्रस्ताव तो हिल कर रह गया इस्राईल जानिए इस प्रस्ताव के निहितार्थ!
Oct १९, २०२३ १६:३२फ़िलिस्तीनी मूल के विख्यात अरब लेखक अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा
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अब समझ में आया कि कर्बला में 72 क्यों थे? क्रूर शासकों के दबाव में पहले भी इंसानियत के मददगार को अकेला छोड़ा जा चुका है
Oct १८, २०२३ १७:३०इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो किसी धर्म की बुराई करने से रोकता है। इस्लाम ने हमेशा अधर्मियों के विरुद्ध मार्चा खोला है। पवित्र क़ुरआन में अल्लाह यह आदेश देता है कि किसी के झूठे ख़ुदाओं को भी बुरा न कहो। साथ ही इस्लाम किसी भी बेगुनाह की हत्या को भी पूरी तरह इंसानियत के ख़िलाफ़ काम मानता है।
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यह कैसे वहशी जानवर हैं जो केवल बच्चों के ख़ून के प्यासे हैं? चुन-चुनकर फ़िलिस्तीनी मासूमों का नरसंहार करता इस्राईल+ वीडियो
Oct १८, २०२३ १५:४८बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि आख़िर फ़िलिस्तीनियों में इतना आक्रोश क्यों देखा जाता है। तो उनकी जानकारी के लिए यह बता दें कि जब माओं की गोद उजड़ती है तो ज़मीन कांप जाती है, आसमान भी ख़ून के आंसू रोता है तो फिर यह तो इंसान हैं जो अपने बच्चों के नरसंहार पर केवल अपना ग़ुस्सा ही दिखा रहे हैं। ज़रा कल्पना करके देखें कि हज़ारों की संख्या में आपके सामने बच्चों की लाशें हों और उनके क़ातिल को दुनिया शाबाशी दे रही हो।
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अकेले दौड़कर पहले स्थान पर आना चाहती हैं आजकल की सरकारें! लोकतंत्र का दावा करने वाले केवल सरकारी तंत्र के हैं सहारे
Oct १७, २०२३ १९:३९आजकल अगर पूरी दुनिया पर नज़र डाली जाए तो शायद ही कुछ देश ही मिलेंगे कि जहां सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था से चल रही है। नहीं तो ज़्यादातर देशों और राज्यों की स्थिति देखने से पता चलता है कि वहां की सरकारें केवल और केवल सरकारी तंत्र और बल के सहारे ही अपना काम कर रही होती हैं। उदाहरण के तौर पर देश का संविधान यह कहता है कि अगर कोई शांति के साथ अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन करना चाहता है तो उसको इस बात की पूरी आज़ादी होगी। लेकिन ज़मीन पर बिल्कुल ऐसा नहीं है।
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फ़िलिस्तीन अभी ज़िन्दा है, अलअक़्सा तूफ़ान ने बहुत सारी तस्वीरों को किया साफ़, एक झटके में नेतन्याहू का सपना हुआ चकनाचूर!
Oct १७, २०२३ १६:५४एक ओर 75 वर्षों से फ़िलिस्तीनी जनता का ख़ून बहाने वाला अवैध आतंकी शासन इस्राईल है और दूसरी ओर सात दशक पहले दर-दर भटक रहे यहूदियों को सिर छिपाने के लिए अपनी जगह देने वाले दयालु, बाहदुर, धैर्यवान और इस समय दुनिया की सबसे पीड़ित फ़िलिस्तीनी जनता है। हंसी के साथ-साथ शर्म आती है उन नेताओं, पत्रकारों और संस्थाओं पर जो फ़िलिस्तीन के संघर्षकर्ताओं को आतंकवादी और इस्राईली आतंकियों को आत्मरक्षा करने वाले सिपाही बता रहे हैं।
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आतंकवाद से मुक़ाबले के नाम पर आतंक के सबसे बड़े समर्थक बने अमेरिका और यूरोपीय देश! हमास और इस्राईल युद्ध में बिकाऊ मीडिया की भी खुली पोल
Oct १६, २०२३ १९:०३हमास और इस्राईल के बीच भयानक युद्ध चल रहा है। इस युद्ध के नुक़सान का अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता। नुक़सान दोनों तरफ हो रहा है। फ़र्क़ सिर्फ इतना है कि इस्राईल के पास नवीनतम हथियार, लाखों प्रशिक्षित सैनिक, एक रक्षा प्रणाली के साथ-साथ विश्व शक्तियां उसका समर्थन कर रही हैं। दूसरी तरफ, केवल हमास है, जिसके पास हज़ारों सैनिक हैं। कोई नई तकनीक नहीं, कोई नए हथियार नहीं, कोई रक्षा प्रणाली नहीं।
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गांधी का देश अब अटल नहीं, फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर भारत सरकार आतंकवाद के साथ! भारत की मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी पार कीं सारी हदें
Oct १०, २०२३ १९:३०फ़िलिस्तीन का मुद्दा एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है कि जिसके वास्तविक्ता शायद ही किसी से छिपी हो। दुनिया का हर देश यह अच्छी तरह से जानता है कि इस्राईल एक अवैध और आक्रमणकारी शासन है। आज जिस प्रकार वह फ़िलिस्तीनियों पर वह बम बरसा रहा है वही आतंकवाद का असली चेहरा है। क्योंकि जिनकी ज़मीन पर उसने अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है उन्हीं को वह अब पूरी तरह फ़िलिस्तीन से बाहर निकालने की योजना पर काम कर रहा है।
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कायरों की तरह लड़ता है इस्राईल, फ़िलिस्तीनी जियालों की ललकार से ज़ायोनी सैनिकों की निकली चीख़
Oct १०, २०२३ १५:२३इस्राईल इस समय जिस तरह गाज़ा पर पाश्विक हमले कर रहा है उससे यह बात तो साबित होती है कि अवैध ज़ायोनी शासन कभी भी आमने-सामने का युद्ध नहीं लड़ सकता है। जब-जब भी इस्राईल का सामना फ़िलिस्तीनी जियालों हुआ है तब-तब उसके आतंकी सैनिक मैदान छोड़कर भागते नज़र आए हैं। सात अक्तूबर को फ़िलिस्तीनी जियालों द्वारा किए गए जवाबी हमले के बाद एक बार फिर ज़ायोनी शासन ने अपना असली चेहरा दिखाते हुए फ़िलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना शुरु कर दिया है।
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आख़िरकार ऊंट आ ही गया पहाड़ के नीचे, कल तक फ़िलिस्तीनियों के ख़ूल से होली खेलने वाला इस्राईल आज मदद की मांग रहा है भीख, आसमान में उड़ते दिखाई दिए फ़िलिस्तीनी जियाले
Oct ०७, २०२३ १६:४७शनिवार की सुबह का सूरज जब बादलों की चीरता हुआ बाहर निकला तो दुनिया को उसकी रोशनी में एक ऐसा तुफ़ान दिखाई दिया कि जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। इस तुफ़ान का नाम था "अलअक़सा तूफ़ान", इस तुफ़ान की शुरुआत हुई फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध आंदोलन हमास की पांच हज़ार मिसाइलों से। उसके बाद तो जैसे-जैसे फ़िलिस्तीनी जियालों के क़दम आगे बढ़ते जा रहे थे वैसे-वैसे इस्राईल के हर पाश्विक हमलों का मुंहतोड़ जवाब उसे मिलता जा रहा था।
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बलात्कारियों का सत्कार करने वालों, मुसलमानों की हत्या करने वालों और जय श्री राम का नारा लगाकर मानवाता को शर्मसार करने वालों का किस आतंकी गुट से है संबंध? इन्हें कौन दे रहा है छूट?
Oct ०४, २०२३ १८:५६इस समय भारत में वैसा ही माहौल है कि जैसा दुनिया की साम्राज्यवादी शक्तियों ने बनाया है। एक ओर तो पूरी दुनिया के मुस्लिम देशों को युद्ध की आग में ढकेला गया और दूसरी ओर आतंकी संगठनों का गठन करके इन्हीं मुस्लिम देशों में रहने वाले मुसलमानों का जनसंहार कराया जा रहा है, वहीं इस्लाम के नाम को आतंकवाद से जोड़कर आम लोगों को इस्लाम से दूर करने की साज़िश भी रची जा रही है। इस समय भारत में भी भगवा आतंकवाद पूरे देश को खोखला करता जा रहा है, लेकिन घरों पर बिल्डोज़र से लेकर इन्काउंटर तक मुसलमानों का ही किया जा