बंग्लादेश में जमाअते इस्लामी पार्टी के एक बड़े नेता को फांसी
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बंग्लादेश में जमाअते इस्लामी पार्टी के एक बड़े नेता 1971 में पाकिस्तान से बंग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान अपराधों के कारण फांसी पर लटकाए गए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ११, २०१६ ०५:०८ Asia/Kolkata
  • (फ़ाइल फ़ोटो)
    (फ़ाइल फ़ोटो)

बंग्लादेश में जमाअते इस्लामी पार्टी के एक बड़े नेता 1971 में पाकिस्तान से बंग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान अपराधों के कारण फांसी पर लटकाए गए।

बंग्लादेश के न्याय व क़ानून मंत्री अनीसुल हक़ के अनुसार, जमाअते इस्लामी के 73 साल के नेता मुतीउर रहमान निज़ामी को मंगलवार को राजधानी ढाका में फांसी दी गयी। उन्हें मंगलवार को स्थानीय समयानुसार 11: 50 p.m. और 12:00 a. m. के बीच फांसी दी गयी। मुतीउर रहमान निज़ामी की एक हफ़्ते पहले मृत्युदंड के फ़ैसले को बदलने की अपील ठुकरा दी गयी थी।  

5 मई को बंग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने निज़ामी की मौत की सज़ा को बदलने की अपील को ठुकरा दिया था।

अक्तूबर 2014 में अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्राइब्यूनल ने मुतीउर रहमान निज़ामी को 1971 में बंग्लादेश की, तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से आज़ादी की जंग के दौरान हत्या, बलात्कार और बड़े बड़े बुद्धिजीवियों की हत्या की योजना बनाने का दोषी ठहराया था।

बंग्लादेश के न्याय व क़ानून मंत्री अनीसुल हक़ ने बताया कि मुतीउर रहमान ने बंग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद से राज्यक्षमा की अपील करने से मना कर दिया था।

2009 में बंग्लादेश की प्रधान मंत्री शैख़ हसीना द्वारा युद्ध अपराध के ट्राइब्यूनल के गठन के बाद से मुतीउर रहमान जमाअते इस्लामी पार्टी के अब तक चौथे बड़े नेता हैं जिन्हें फांसी दी गयी है।

अभियोक्ताओं के अनुसार, मुतीउर रहमान 1971 में पाकिस्तान समर्थक अलबद्र मिलिशिया के स्थापना के ज़िम्मेदार थे जिसने कथित रूप से बड़े बड़े लेखकों, डॉक्टरों और पत्रकारों को 1971 की लड़ाई के दौरान मार डाला। बंग्लादेश की सरकार का कहना है कि इस जंग में 30 लाख लोग मारे गए। (MAQ/N)