डेनमार्क में भारतीय प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु को नुकसान पहुंचाने में भारत की भूमिका नगण्य और इसे बचाने में सबसे आगे है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पृथ्वी के दोहन में भारत की कोई भूमिका नहीं है, लेकिन यह इसे बचाने के प्रयासों में सबसे आगे है, जो देश के हर व्यक्ति द्वारा किए गए प्रयासों से समर्थित है।
नरेन्द्र मोदी ने डेनमार्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, ग्लासगो में सीओपी-26 जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत द्वारा जताई गई प्रतिबद्धताओं के बारे में विस्तार से बात की।
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने जलवायु कार्यों को पूरा करने में सक्षम रहा है, क्योंकि अन्य देशों के विपरीत, जो ग्रह को बचाने की सारी जिम्मेदारी बहुपक्षीय संगठनों पर डालते हैं, हम इसे प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं कि वह दुनिया को बचाने के लिए अपना योगदान दे।
बेल्ला सेंटर में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करने के लिए नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करने से पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने उनका परिचय एक मित्र के रूप में कराया।
डेनमार्क में भारतीय समुदाय के 1,000 से अधिक लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया जिनमें छात्र, शोधकर्ता, पेशेवर और व्यवसायी शामिल थे।
भारतीय प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों को वहां भारत का राजदूत बताया और उनमें से प्रत्येक से कम से कम पांच गैर-भारतीय मित्रों को भारत की यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि हमें अपने पर्यटन क्षेत्र को फिर से जीवंत करना होगा। आपके प्रयासों से, जब आप अपने पांच गैर-भारतीय मित्रों को हमारे देश का दौरा करने में मदद करेंगे, तो कुछ वर्षों में केवल एक ही गंतव्य होगा, वह है चलो इंडिया।
जलवायु के संबंध में किये जाने वाले प्रयायों के बारे में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत ने 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है और वह उन कुछ देशों में से एक है जो अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन से प्राप्त करने की प्रतिबद्धता जतायी थी। हमने नौ साल पहले उस लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
उन्होंने कहा कि भारत 2.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से सस्ती सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है और लागत को और कम करने का प्रयास कर रहा है।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दुनिया को पृथ्वी को बचाने के लिए जवाब और समाधान खोजने के लिए भारत आना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं अपने डेनिश दोस्तों से कहना चाहता हूं कि वे संयुक्त रूप से भारत आएं और पृथ्वी की समस्याओं का जवाब तलाशें। MM
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