कश्मीरी पंडित अब भी लावारिस, केन्द्र अपनी बग़ले बजा रहा है
भारत की केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद भी कश्मीर और कश्मीरी पंडितों के हालात में कुछ बदलाव नज़र नहीं आ रहा है।
घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन जारी है। 1990 में शुरू हुआ कश्मीरी पंडितों का पलायन 2022 में भी जारी है। मंगलवार को 10 कश्मीरी पंडित परिवार डर के कारण शोपियां ज़िले में स्थित अपना गांव छोड़कर जम्मू पहुंच गए हैं।
जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा हाल ही में कई टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया है। चौधरीगुंड गांव के लोगों ने कहा कि हालिया हमलों ने उन पंडितों के बीच एक प्रकार का भय पैदा कर दिया है, जो 1990 के दशक में अलगाववाद के सबसे कठिन दौर में भी कश्मीर में रहते थे और उन्होंने अपना घर नहीं छोड़ा था।
हाल ही में मौत की धमकी का सामना करने वाले चौधरीगुंड गांव के एक व्यक्ति ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि 35 से 40 कश्मीरी पंडितों वाले दस परिवार डर के कारण हमारे गांव से बाहर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि गांव अब खाली हो गया है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि हमारे लिए कश्मीर घाटी में रहने के लिए स्थिति अनुकूल नहीं है। हम हत्याओं के कारण डर में जी रहे हैं, हमारे लिए कोई सुरक्षा नहीं है। (AK)
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