भारत में असहिष्णुता के माहौल के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील
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भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि भारत में वर्तमान में व्याप्त ‘असहिष्णुता का माहौल’ लंबे समय तक नहीं रहेगा और इसके ख़िलाफ़ लड़ने के लिए लोगों को एकजुट होना होगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १०, २०२३ ०९:५७ Asia/Kolkata
  • भारत में असहिष्णुता के माहौल के ख़िलाफ़ एकजुट होने की अपील

भारत के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा कि भारत में वर्तमान में व्याप्त ‘असहिष्णुता का माहौल’ लंबे समय तक नहीं रहेगा और इसके ख़िलाफ़ लड़ने के लिए लोगों को एकजुट होना होगा।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रख्यात अर्थशास्त्री ने अमर्त्य सेन शोध केंद्र में अपने नाना क्षितिमोहन सेन की ‘युक्त साधना’ की अवधारणा पर कोलकाता में प्रतीची ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहेगी, लोग अगर सहमत नहीं हैं या दूसरों की बात नहीं मानते हैं तो उन्हें पीटा जा रहा है, लोगों को मिलकर काम करना होगा, मतभेद दूर किए जाने चाहिए, हमें अपने बीच की दूरियों को कम करने की जरूरत है।

एक छात्र के सवाल के जवाब में सेन ने कहा कि क्या विविधता हमेशा अच्छी होती है? हाल ही में भारत में विविधता आई है जो पहले नहीं थी, विविधता के फ़ायदे और नुकसान, दोनों को देखने की ज़रूरत है।

एक शिक्षक द्वारा यह पूछे जाने पर कि ‘हम देश की विविधता को कैसे बरकरार रख सकते हैं’, सेन ने महात्मा गांधी के शब्दों की याद दिलाते हुए कहा, ‘गांधी ने आज़ादी की लड़ाई के शुरुआती दौर में कहा था कि हमें अपने बीच की दूरियों को कम करना चाहिए, दूसरों का सम्मान करने की हमारी क्षमता कम होती जा रही है और यह एक कारण है कि हम पिछड़ रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमर्त्य सेन ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि अलग-अलग दृष्टिकोणों का सम्मान करने की घटती क्षमता हमें एक राष्ट्र के रूप में वास्तव में प्रगति करने से पीछे रखने के लिए जिम्मेदार है, उन्होंने यह भी कहा कि सीएए लोगों को विभाजित करने का एक प्रयास था।

सेन ने कहा, ‘उल्लेखनीय बात यह है कि अक्सर एक-दूसरे का अनुसरण करने की हमारी क्षमता असाधारण रूप से सीमित होती है, हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जिसमें समझ बहुत सीमित है और यह अलग-अलग रूप ले सकती है, इस समय जो सामान्य है, वह धर्मों और जातियों के बीच भयानक गलतफहमी है, कुछ जातिगत अंतर समझ की कमी, निरक्षरता और अज्ञानता से आते हैं।

उनके इस बयान पर राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा है कि हम उनके बयान का स्वागत करते हैं, वह वास्तव में उस स्थिति की आलोचना कर रहे हैं, जिसमें भाजपा पूरे देश को धर्म, जाति, लिंग और भाषा के आधार पर विभाजित कर रही है।

माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि उन्होंने एक सच्चे विचारक के तौर पर अपनी समझ जाहिर की, वह उस बहुलवाद और एकता की परंपरा के पथप्रदर्शक हैं, जिसे भारत ने रवींद्रनाथ टैगोर जैसों से पाया है।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि वह एक अर्थशास्त्री हैं. लेकिन क्या उन्होंने अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ कहा? सेन को भारत के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है, जो अब विश्व स्तर पर मज़बूत होकर उभरा है।

ज्ञात रहे कि अमर्त्य सेन पहले भी कई मौकों पर देश के मौजूदा हालातों को लेकर चिंता जता चुके हैं, जुलाई 2022 में उन्होंने कहा था कि राजनीतिक अवसरवाद के लिए लोगों को बांटा जा रहा है। (AK)

 

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