मणिपुर जल रहा है, ताज़ा घटनाओं में कई लोगों की हत्या
मणिपुर में पिछले दो महीने से हिंसा जारी है। अधिकारियों ने कहा कि 7 जुलाई को बिष्णुपुर ज़िले में हुईं अलग-अलग घटनाओं में मणिपुर पुलिस कमांडो और एक किशोर लड़के सहित चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और कई अन्य घायल हो गए।
शुक्रवार शाम को मोइरंग तुरेल मापन में संदिग्ध उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, वहीं सुबह के समय बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिलों की सीमा से लगे कांगवई, सोंगडो और अवांग लेखई गांवों में अन्य तीन लोग मारे गए।
पुलिस के अनुसार, मारे गए लोगों में से दो कुकी समुदाय से हैं और तीसरा 17 वर्षीय एम. रिकी मेईतेई समुदाय से है। सूत्रों ने कहा कि रिकी को एक गोली तब लगी, जब वह प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच गोलीबारी के कारण अपने गांव से भागने की कोशिश कर रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए कुकी समुदाय के दोनों लोगों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच, भीड़ ने इलाके में सुरक्षा बलों की आवाजाही को रोकना जारी रखा। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्गों से अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं।
राज्य में जब से झड़पें शुरू हुई हैं कांगवई क्षेत्र एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है। सुरक्षा बलों ने इलाके में एक बफर जोन बनाया है और हिंसा को रोकने के लिए कर्मचारियों को तैनात किया है हालांकि, दोनों पक्षों के उपद्रवियों द्वारा एक-दूसरे पर हमला और गोलीबारी जारी है।
सुरक्षा बल दोनों समुदायों को शामिल करके क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।
हिंसा को नियंत्रित करने और राज्य में सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए मणिपुर पुलिस के अलावा लगभग 40 हज़ार केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते 3 मई से कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक लगभग 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 3 हज़ार से अधिक लोग घायल हुए हैं जबकि लगभग 60 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं। (AK)
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