मानवाधिकारों के मामले पर अमरीका, भारत से क्या चाहता है?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका की यात्रा से पहले यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि क्या अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन मोदी से भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, लोकतंत्र में गिरावट और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अमरीकी चिंताओं का ज़िक्र करेंगे?
(last modified 2023-07-09T05:01:23+00:00 )
Jul ०९, २०२३ १०:२९ Asia/Kolkata
  • मानवाधिकारों के मामले पर अमरीका, भारत से क्या चाहता है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका की यात्रा से पहले यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि क्या अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन मोदी से भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, लोकतंत्र में गिरावट और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अमरीकी चिंताओं का ज़िक्र करेंगे?

अमरीका जो चीन से मुक़ाबले के लिए भारत को अपने लिए सबसे ज़रूरी साथी समझता है, उसके साथ क़रीब, हर क्षेत्र में संबंधों का विस्तार चाहता है, लेकिन उसके लिए उसे भारत से कुछ अपरक्षाए हैं। अगर भारत उसकी इन उम्मीदों को पूरा करता है, तो वाशिंगटन लोकतंत्र, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों से आसानी से समझौता कर सकता है, जैसा कि उसका इतिहास भी गवाह है।

यही वजह है कि दुनिया भर को इन मुद्दों पर लेक्चर देने वाला अमरीका, मोदी के इस दौरे पर सीधे रूप से इन मुद्दों को उठाने से कतराता रहा। हालांकि अमरीकी अधिकारी यह भी अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर वे इन मुद्दों को अगर पूरी तरह से नज़र अंदाज़ करते हैं, तो उन्हें अपनी जनता को जवाब देना भारी पड़ जाएगा। शायद यही वजह है कि वह मोदी को दिखावे के तौर पर ही सही, मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए राज़ी करना चाहता है।

यही वजह है कि मोदी की अमरीका की यात्रा के बाद, अमरीकी मानवाधिकार विभाग की आला अफ़सर भारत दौरा करने वाली हैं। नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र, मानवाधिकार और तिब्बत मामलों पर विशेष अमरीकी को-ऑर्डिनेटर उज़रा ज़िया भारत की अपनी यात्रा के दौरान, सरकार और नागरिक संगठनों के शीर्ष अधिकारियों से बात करेंगी और दलाई लामा से भी मुलाक़ात करेंगी। जून में मोदी और बाइडन की मुलाकात के बाद किसी अमरीकी उच्च अधिकारी के नेतृत्व में किसी शिष्टमंडल का यह पहला भारत दौरा होगा।

यहां दिलचस्प बात यह है कि अमरीका मानवाधिकारों को लेकर जितना दिखावा करता है, मोदी सरकार उससे किसी भी तरह से पीछे नहीं है। मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में मोदी सरकार का रिकार्ड तो किसी से छिपा नहीं है, चाहे वह 2002 के जुरात दंगों के दौरान मुसलमानों का नरसंहार हो या 2014 के बाद प्रधान मंत्री बनने के बाद, मुसलमानों की लिंचिंग और हत्याएं हों।  लेकिन जब वह किसी विदेश दौरे पर जाते हैं तो सिर्फ़ महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध और अहिंसा की बात करते हैं। यहां तक कि वह भारतीय इतिहास के सबसे बड़े सच जात के आधार पर भेदभाव से भी इंकार करते नज़र आते हैं, जैसा कि उन्होंने अमरीका की अपनी हालिया यात्रा के दौरान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में धर्म, जाति, उम्र या भू-भाग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोकतंत्र के मूल्यों के आधार पर बने संविधान के आधार पर चलती है तो पक्षपात का कोई सवाल ही नहीं उठता है।