तालेबान ने क्या कहकर अज़ादारी को सीमित पैमाने पर मनाने को कहा?
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अफगानिस्तान में शिया विद्वानों व धर्मगुरूओं की परिषद ने तालेबान से मांग की है कि मोहर्रम में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में कुछ सीमितताओं के बारे में पुनर्विचार करे।
(last modified 2023-07-20T09:31:56+00:00 )
Jul २०, २०२३ १४:४६ Asia/Kolkata
  • तालेबान ने क्या कहकर अज़ादारी को सीमित पैमाने पर मनाने को कहा?

अफगानिस्तान में शिया विद्वानों व धर्मगुरूओं की परिषद ने तालेबान से मांग की है कि मोहर्रम में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में कुछ सीमितताओं के बारे में पुनर्विचार करे।

इस परिषद ने अपने बयान में एलान किया है कि तालेबान सरकार के अधिकारियों से मुलाकात में अज़ादारी के संबंध में जो सीमायें बयान की गयी हैं उनके बारे में वार्ता की गयी। तालेबान गुट ने सुरक्षा कारणों से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मनाये जाने के संबंध कुछ सीमितताओं की घोषणा की है। तालेबान की ओर से अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में सीमायें एसी स्थिति में लगाई हैं जब राजनीतिक, सैनिक और स्थानीय अधिकारियों ने बारमबार बल देकर कहा है कि शीया मुसलमानों के अधिकारों विशेषकर अज़ादारी के संबंध में उनके अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिये।

तालेबान ने मोहर्रम में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में जो सीमितायें लागू की हैं उसकी कुछ पहलुओं से समीक्षा की जा सकती है। तालेबान ने अज़ादारी के संबंध में जो सीमितता लागू की है उसकी एक वजह यह है कि अज़ादारी के संबंध में समस्त तालेबान का एक दृष्टिकोण नहीं है। दूसरा कारण यह है कि तालेबान इस बात में गम्भीर नहीं है कि अज़ादारी या ग़ैर अज़ादारी में शियों के अधिकारों का ध्यान रखा जाये। तीसरा कारण यह हो सकता है कि तालेबान अज़ादारों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने में सक्षम नहीं है। चौथा कारण यह हो सकता है कि तालेबान अज़ादारी को नुकसान पहुंचाने के लक्ष्य से सीमायें बयान कर रहा है।

इस संबंध में एक राजनीतिक टीकाकार आरिफ अकरमी कहते हैं कि हर साल अफगानिस्तान में बड़ी श्रृद्धा के साथ इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मनाई जाती है और बहुत बड़ी संख्या में लोग उसमें भाग लते हैं और लोग इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मोहब्बत में अज़ादारी की समारोहों की सुरक्षा में मदद करते हैं। इस आधार पर यद्यपि मोहर्रम के समारोहों व कार्यक्रमों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है परंतु प्रतीत नहीं हो रहा है कि तालेबान इसकी सुरक्षा में अक्षम है।

इसी कारण अफगानिस्तान में शिया विद्वानों और धर्मगुरूओं की परिषद ने इससे पहले तालेबान ने जो सहयोग किया था उसका आभार व्यक्त किया और तालेबान से मांग की है कि उसने अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में जिस सीमा का एलान किया है उसके संबंध में पुनर्विचार करे ताकि शिया मुसलमान इससे पहले वाले वर्ष की भांति इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी मना सकें। इस संबंध में एक अन्य राजनीतिक टीकाकार सैयद ईसा मज़ारी हुसैनी कहते हैं कि अफगानिस्तान के लोग अज़ादारी के समारोहों व कार्यक्रमों की सुरक्षा में तालेबान की मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

तालेबान गुट के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि मोहर्रम में अज़ादारी के समारोहों व कार्यक्रमों के आयोजन में शीया पूरी तरह आज़ाद हैं और तालेबान की सरकार धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन करती है। एक तरफ से अज़ादारी मनाये जाने के संबंध में तालेबान की ओर से सीमायें बयान की गयी हैं और दूसरी ओर तालेबान के प्रवक्ता यह कह रहे हैं कि अज़ादारी मनाने में शिया पूरी तरह आज़ाद हैं तो तालेबान के फैसले में स्पष्ट विरोधाभास है।  MM

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