34 साल के बाद, कश्मीर में ऐतिहासिक जुलूस बरामद
30 साल से ज़्यादा अरसे के बाद, भारत प्रशासित कश्मीर में शिया मुसलमानों ने ऐतिहासिक 8 मोहर्रम का जुलूस निकाला और कर्बला के शहीदों का मातम मनाया।
गुरुवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, यह ऐतिहासिक जुलूस श्रीनगर शहर के केन्द्रीय इलाक़े से गुज़रा, जिसमें भाग लेने वाले हज़ारों कश्मीरी मुसलमानों ने काले कपड़े पहने हुए थे और हाथों में अलम हुए थे।
मोहर्रम का महीना, शिया मुसलमानों के लिए इस्लामी कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण महीनों में से एक है, जब दुनिया भर के मुसलमान पैग़म्बरे इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन (अ) और उनके 72 साथियों की शहादत का ग़म मनाते हैं और उनकी याद में जुलूस निकालते हैं।
भारत के एकमात्र मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में 1989 में अलगाववादी गतिविधियों के कारण, शासन ने मोहर्रम के जुलूसों पर भी पाबंदी लगा दी थी, जिसके बाद से गुरुवार 27 जुलाई को पहली बार ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया।
हिमालयी क्षेत्र कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान दोनों दावा करते हैं, और 1947 में ब्रिटिश शासन से आज़ादी के बाद से दोनों का उसके कुछ हिस्सों पर शासन है।
परमाणु संपन्न दोनों देशों के बीच अब तक लड़े गए तीन पूर्ण युद्धों में से दो इसी क्षेत्र को लेकर लड़े गए हैं। भारत, पड़ोसी देश पाकिस्तान पर सशस्त्र अलगाववादियों के समर्थन का आरोप लगाता रहा है, जबकि इस्लामाबाद ने हमेशा इस आरोप से इंकार किया है। msm