चीन द्वारा जारी किए गए मैप पर भारत का भारी एतेराज़
चीन ने एक नक़्शा जारी किया है जिस पर भारत की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई है और कहा गया है कि चीन ने इस नक़्शे में बहुत सारे भारतीय इलाक़ों को चीन का इलाक़ा दिखाया है।
मैप जारी होने के बाद इस तरह की अटकलें हैं कि भारत और चीन के तनावग्रस्त संबंधों में जटिलता बढ़ेगी।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मैप पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हमने कूटनैतिक चैनलों से चीन को अपने भारी एतेराज़ से अवगत करा दिया है जिसने अपने नक़्शे में भारत के इलाक़ों को अपना इलाक़ा दिखाया है।
नई दिल्ली का कहना है कि चीन की सत्ताधारी पार्टी के अख़बार ग्लोबल टाइम्ज़ ने चीन का जो नया नक़्शा प्रकाशित किया है उसमें भारत के दो इलाक़ों को चीन का इलाक़ा ज़ाहिर किया गया है।
भारत और चीन के बीच साढ़े हज़ार किलोमीटर लंबी सीमा है और कई जगहों पर दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद है।
अरुणाचल प्रदेश और अकसाई चीन के इलाक़ों को लेकर दोनों देशों के दावों में टकराव है। चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का भाग मानता है। इस इलाक़े में 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हो चुका है।
दूसरा चीन अकसाई चीन का है जो स्ट्रैटेजिक मार्ग है यह तिब्बत और पश्चिमी चीन को जोड़ने वाली पहाड़ियों के बीच स्थित है।
अकसाई चीन के क़रीब स्थित गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें हुई थीं जिनमें भारत के 20 और चीन के कम से कम 4 सैनिक मारे गए थे।
इसके बाद से दोनों देशों ने एलएसी पर भारी संख्या में सैनिक तैनात कर रखे हैं। दोनों देशों के बड़े सैन्य अधिकारियों के बीच 19 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन तनाव कम नहीं हो रहा है।
दक्षिणी अफ़्रीक़ा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाक़ात हुई थी लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद मैप का मुद्दा सामने आ गया है।
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