विधान सभा चुनावों से पहले चढ़ता सियासी पारा, अखिलेश की हुई साईकिल
भारत के पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों से पहले राजनैतिक और प्रचारिक गतिविधियों का पारा चढ़ता जा रहा है।
उत्तर प्रेदश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में मुलायम और अखिलेश के बीच जारी जंग के तहत चुनाव आयोग ने सोमवार को पार्टी का चुनाव चिन्ह 'साइकिल' अखिलेश के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को देने का फैसला सुनाया है।
इस फ़ैसले को मुलायम सिंह यादव ख़ैमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने अखिलेश खेमे की दलीलों से सहमति जताते हुए स्पष्ट कर दिया कि वही असली समाजवादी पार्टी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक की। शुक्रवार को अखिलेश और मुलायम सिंह यादव के वकीलों ने चुनाव आयोग में अपना अपना पक्ष रखा था। अखिलेश यादव के वकील कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के आगे दलील दी कि पार्टी के संगठन के साथ सांसद, विधायक और एमएलसी अखिलेश के साथ हैं, इसलिए नियमों के अनुसार असली समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही कही जाएगी।
इस बीच अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की अटकलें तेज़ हो गई हैं।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची का ऐलान कर दिया है। इसमें पार्टी ने उत्तराखंड से 64 उम्मीदवार और उत्तर प्रदेश से 149 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। इस लिस्ट में कोई भी मुसलमान उम्मीदवार नहीं है।
बसपा पहले ही अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान कर चुकी है। वामदलों ने रविवार को प्रत्याशियों की घोषणा की। समाजवादी पार्टी की ओर से मुलायम-अखिलेश खेमों ने अब तक कई उम्मीदवारों का ऐलान किया है।
इसी बीच पूर्व क्रिकेटर और भाजपा से नाता तोड़ लेने वाले नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मैं तो पैदायशी कांग्रेसी हूं, और यह मेरी घर वापसी है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा है कि 53-वर्षीय सिद्धू उनकी पार्टी के स्टार प्रचारक होंगे।