कांग्रेस, करप्शन और कपिल मिश्रा
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दिल्ली में शायद कोई दिन एसा नहीं जाता जो जिस दिन कांग्रेस और बीजेपी वाले आम आदमी पार्टी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन न करते हों और अब तो ख़ुद आम आदमी पार्टी के एक निष्कासित मंत्री कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है तो कांग्रेस और भाजपा वाले भला किस तरह इस अवसर  को अपने हाथ से जाने देंगे?
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०८, २०१७ १२:५३ Asia/Kolkata
  • कांग्रेस, करप्शन और कपिल मिश्रा

दिल्ली में शायद कोई दिन एसा नहीं जाता जो जिस दिन कांग्रेस और बीजेपी वाले आम आदमी पार्टी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन न करते हों और अब तो ख़ुद आम आदमी पार्टी के एक निष्कासित मंत्री कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है तो कांग्रेस और भाजपा वाले भला किस तरह इस अवसर  को अपने हाथ से जाने देंगे?

हम को भाजपा की ओर से होने वाले हमलों पर कोई हैरत नहीं होती क्योंकि उसका तो एजेंडा ही यह है कि सेक्युलर ताक़तों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनसे सत्ता छीन ले। हैरत तो कांग्रेस की हरकतों पर होती है जो अपनी दुर्दशा का इलाज करने के बजाए अपनी क़ब्र को और गहरा करने में लगी है। सांप्रदायिक ताक़तों के साथ अतीत में उसकी मिलीभगत बाबरी मस्जिद का ताला खोले जाने, शिलान्यास करवाने और विध्वंस के अवसर पर केन्द्रीय बलों को हरकत न करने के आदेश से साबित हो चुकी है।

एक बार फिर कांग्रेस के नेता जिस तरह भाजपा के सुर में सुर मिला रहे हैं उसको देख कर फिर सांप्रदायिक ताक़तों से उसकी मिलीभगत स्पष्ट हो रही है। कितनी हास्यास्पद बात है कि जिस पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर नेशनल हेराल्ड के खातों में हेरफेर करके करोड़ों रूपए के भ्रष्टाचार का मुक़द्दमा चला रहा है उसी पार्टी के नेता अपनी पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से नहीं बल्कि केजरीवाल से दो करोड़ रूपए के भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं?

ज़रा सोचिए यह वहीं कांग्रेस है जिसके शासनकाल में कोयला घोटाला, टेलीकाम घोटाला, कामनवेल्थ घोटाला और हेलीकाप्टर घोटाला हुआ मगर उसने किसी से त्यागपत्र देने को नहीं कहा। यह भी सोचने की बात है कि भ्रष्टाचार की दलदल में गले तक डूब चुकी कांग्रेस को अचानक क्रप्शन इतना बुरा कैसे लगने लगा?

हमारा मानना है कि इस नीति से कांग्रेस को कोई फ़ायदा पहुंचने के बजाए नुक़सान ही पहुंचेगा क्योंकि हर सेक्युलर स्वभाव व्यक्ति कांग्रेस को ही धर्म निरपेक्षता का क़ातिल समझेगा। जहां तक कपिल मिश्रा का सवाल है तो उनका सीधा से जवाब यही है कि जब उनको हटा दिया गया तब केजरीवाल में उनको सारे कीड़े नज़र आने लगे, हटाने से पहले तक केजरीवाल उनके आइडियल थे।

हर आम आदमी यह जानना चाहता है कि जिसको भी मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है वह प्रेस कान्फ़्रेन्स में एसे ही धमाकेदार आरोप लगाता है।

आख़िरी बात यह है कि कपिल मिश्रा के आरोपों के बाद यह बात साबित हो जाती है कि आम आदमी पार्टी के भीतर सेंध लगाने के लिए भाजपा ने जिन लोगों की सेवाएं ली हैं वह अपना काम बहुत अच्छे तरीक़े से अंजाम दे रहे हैं।

(वरिष्ठ टीकाकार शकील हसन शम्सी के लेख का संक्षिप्त रूपांतर)