भारतीय सेना प्रमुखः हिंसा के बजाए किताबें और लैपटाप चुनें कश्मीरी युवा
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भारत के थल सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भारत नियंत्रित कश्मीर के युवाओं से कहा कि जम्मू व कश्मीर में हिंसा के चलते कई नस्लें तबाह हो चुकी हैं, छात्रों को चाहिए कि किताबें और लैपटाप का रास्ता चुनें और हिंसा के चक्र को समाप्त करने में मदद करें।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun १४, २०१७ ०४:२९ Asia/Kolkata
  • भारतीय सेना प्रमुखः हिंसा के बजाए किताबें और लैपटाप चुनें कश्मीरी युवा

भारत के थल सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भारत नियंत्रित कश्मीर के युवाओं से कहा कि जम्मू व कश्मीर में हिंसा के चलते कई नस्लें तबाह हो चुकी हैं, छात्रों को चाहिए कि किताबें और लैपटाप का रास्ता चुनें और हिंसा के चक्र को समाप्त करने में मदद करें।

सेना द्वारा समर्थिक कश्मीरी छात्रों के एक समूह को जिसने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्नालोजी की कठिन प्रवेश परीक्षा पास की, संबोधित करते हुए बिपिन रावत ने कहा कि उनकी यह सफलता आसान नहीं थी और वह अब घाटी के युवाओं के लिए उज्जवल उदाहरण बन गए हैं।

बिपिन रावत ने कहा कि कितनी नस्लें फ़ायरिंग और विस्फोटकों के धुआं देखेंगी? कई नस्लें इसी कारण तबाह हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों के मन में हमेशा यह भय समाया रहता है कि कहीं सैनिक या छापामार न आ जाएं। रावत ने कहा कि इस प्रकार एक ओर सुरक्षा बल हैं और दूसरी ओर छापामार हैं। इस वातावरण में हम कब तक रह सकते हैं हमें इसका अंत करना होगा। हम चाहते हैं कि शांति बहाल हो जाए और हम बिना किसी समस्या के अपनी दिनचर्या कर सकें।

सेना प्रमुख  ने कहा कि वर्तमान हिंसा के कारण घाटी में टूरिज़्म में गिरावट आई है। कश्मीर जन्नत है, हमें उसे उसी स्थान पर पहुंचाना है जहां वह पहले था, सारी दुनिया से लोगों के झुंड यहां आया करते थे जो वर्तमान स्थिति के कारण अब नहीं आ रहे हैं।

भारत में केन्द्र सरकारें कश्मीर के लोगों को मानसिक रूप से भारत से क़रीब लाने के लिए कुछ नीतियों पर काम करती रही हैं लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि उसने अपनी कठोर नीतियों से कश्मीर के हालात ख़राब कर दिए।