"तेहरान आतंकी हमले में सऊदी अरब का हाथ हो सकता है"
नई दिल्ली की वरिष्ठ अध्ययनकर्ता और थिंक टैंक ने बल दिया है कि सात जून को होने वाले आतंकी हमले में सऊदी अरब के लिप्त होने की संभावना है।
देबोलीना राहुल घोषाल ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि आतंकवादी गुटों का वैचारिक गढ़ सऊदी अरब है और रियाज़ कुछ इस्लामी देशों को अशांत करने और शिया मुसलमानों के जनसंहार का समर्थन करता है।
इस राजनैतिक टीकाकार ने इसी प्रकार यमन युद्ध में सऊदी अरब की पराजय की ओर संकेत करते हुए कहा कि रियाज़, क़तर से युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि क़तर को अलग थलग करने के सऊदी अरब के प्रयास के कारण रियाज़ अधिक कमज़ोर पड़ जाएगा।
इस भारतीय अध्ययनकर्ता का कहना है कि क़तर को अलग थलग करने के बारे में ट्रम्प द्वारा सऊदी अरब का समर्थन, बहुत बड़ी ग़लती है। उन्होंने कहा कि क़तर में दो अमरीकी छावनी मौजूद है जिसके कारण वाशिंग्टन, क़तर को अलग थलग करने की नीति पर पुनर्विचार करने पर विवश हो जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारतीय विशेषज्ञ ने क्षेत्र में बदलते समीकरणों की ओर संकेत करते हुए कहा कि क्षेत्र में रूस और चीन जैसी शक्ति के होने के कारण मध्यपूर्व के देशों में अमरीका का वर्चस्व जमाने का सपना चकनाचूर हो गया है। (ak)