भारतीय मुसलमानों से जन्नतुल बक़ी सप्ताह मनाने की अहलेबैत काउंसिल की अपील
भारत में अहलेबैत काउंसिल की ओर से 2 शव्वाल से 8 शव्वाल तक जन्नतुल बक़ी सप्ताह मानने की घोषणा की गई है।
अहलेबैत काउंसिल की ओर से भी अवसर पर व्यापक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित होंगे। आठ शव्वाल का इतिहास एक बहुत ही दुखद घटना की याद दिलाता है। ऐसी घटना जिसने अहलेबैत अलैहिस्सलाम से श्रद्धा रखने वालों को दुखी कर दिया। इस दिन तकफ़ीरी टोले आले सऊद ने पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के मज़ारों को ध्वस्त कर दिया था। इसीलिए अहलेबैत काउंसिल ने इस दुखद घटना की याद मनाने और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए 2 शव्वाल से 8 शव्वाल तक जन्नतुल बक़ी सप्ताह बनाने की घोषणा की है। ज्ञात रहे कि जन्नतुल बक़ी के पुननिर्माण का आंदोलन दो कारणों से बहुत ही महत्वपूर्ण है। पहला यह कि इस साल इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम के जन्म दिन को 1400 साल पूरे हुए हैं और दूसरा यह कि आले सऊद और ज़ायोनी शासन के प्राचीन और गुप्त रिश्ते दुनिया वालों पर स्पष्ट हो चुके हैं।
अहलेबैत काउंसिल ने दुनिया के मुसलमानों से इस सप्ताह निम्न लिखित कार्यक्रम का आह्वान किया हैः
1 - आले सऊद और सऊदी सरकार के विरुद्ध प्रदर्शनों का आयोजन।
2 - संयुक्त राष्ट्र संघ और मानवाधिकार संस्थाओं से जन्नतुल बक़ी के पुननिर्माण की अपील ।
3 – संयुक्त राष्ट्र संघ और भारत के प्रधानमंत्री को जन्नतुल बक़ी के निर्माण के लिए मेमोरेंडम भेजना।
4 – शोक सभाओं और जूलूसों का आयोजन, सोशल मीडिया पर जन्नतुल बक़ी के निर्माण की अधिक से अधिक मांग करना।
5 - 2 शव्वाल से 8 शव्वाल के बीच भारत के मुसलमान हस्ताक्षर अभियान चलाएं और इस हस्ताक्षर अभियान का मेमोरेंडम संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम अपने ज़िले के डीएम को सौपें।
ज्ञात रहे कि 8 शव्वाल सन 1344 हिजरी क़मरी को आले सऊद के आदेश पर दरबारी व भेदभाव रखने वाले वहाबी मुफ़्तियों के फ़त्वों के बाद पवित्र नगर मदीने में स्थित जन्नतुल बक़ी नामक क़ब्रिस्तान में पैग़म्बरे इस्लाम की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और चार इमामों के रौज़ों को ध्वस्त कर दिया गया था।
आले सऊद ने जब मक्के और मदीने पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया तो उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के पवित्र रौज़ों को ध्वस्त करने की योजना बनाई। इसके लिए उसने काज़ी सुलैमान को पवित्र नगर मदीना रवाना किया ताकि वह वहाँ के मुफ़्तियों से अपनी मर्ज़ी के फ़तवे हासिल करे और जन्नतुल बक़ी को ध्वस्त करने की भूमिका प्रशस्त करे। दरबारी कठमुल्लाओं ने जन्नतुल बक़ी को ध्वस्त करने का फ़तवा जारी कर दिया।
इस हृदयविदारक घटना के बाद इस्लामी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई और रौज़ों के पुनर्निर्माण के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाया गया मगर वहाबियों ने, जिन्हें साम्राज्यवादी शक्तियों का भरपूर समर्थन हासिल है, अभी तक इस्लामी दुनिया की इस मांग को नहीं माना है।
जन्नतुल बक़ी में इमाम हसन, इमाम ज़ैनुल आबेदीन, इमाम मुहम्मद बाक़िर और इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिमुस्सलाम की क़ब्रें हैं। एक रिवायत के अनुसार उसी स्थान पर हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुलल्ह अलैहा की भी क़ब्र है। (AK)