लद्दाख़ जैसी घटना भारत या चीन किसी के भी हित में नहीं,
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भारत ने कहा है कि डोकलाम गतिरोध के बारे में चीन के साथ मिलकर समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा लेकिन लद्दाख में जो घटना घटी है वह किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug १९, २०१७ ०७:०२ Asia/Kolkata
  • लद्दाख़ जैसी घटना भारत या चीन किसी के भी हित में नहीं,

भारत ने कहा है कि डोकलाम गतिरोध के बारे में चीन के साथ मिलकर समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा लेकिन लद्दाख में जो घटना घटी है वह किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि आज मैं पुष्टि कर रहा हूं कि गत 15 अगस्त को लद्दाख़ के पान्गोंग त्सो में घटना हुई जिसके बारे में दोनों पक्षों के कमांडरों से बातचीत हुई, इस प्रकार की घटनाएं किसी भी पक्ष के हित में नहीं हैं।

प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि केवल पथराव हुआ था या लाठी और राड से भी मारपीट हुई थी। प्रवक्ता ने बल देकर कहा कि इस घटना को किसी अन्य बिंदु पर जारी गतिरोध से नहीं जोड़ना चाहिए।

रवीश कुमार ने यह भी नहीं बताया कि अगले महीने ब्रिक्स की बैठक में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी चीन की यात्रा करेंगे या नहीं? प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में उनके पास कोई सूचना नहीं है।

डोकलाम गतिरोध के बारे में रवीश कुमार ने कहा कि यह संवेदनशील मामला है इस पर हम चीन के साथ बातचीत करेंगे और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजेंगे लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि डोकलाम समस्या कब तक हल होगी।

विदेश मंत्रालय ने इस सवाल के जवाब में कि क्या असम में आई बाढ़ में चीन का हाथ हो सकता है? कहा कि असम की बाढ़ को अभी से चीन से जोड़ देना जल्दबाज़ी होगी। वैसे चीन ने 2006 में तय पाने वाली मेकैनिज़्म के तहत पानी संबंधी जानकारी साझा नहीं की है लेकिन इसके कुछ तकनीकी कारण भी हो सकते हैं।

डोकलाम गतिरोध पर नई दिल्ली में जापान के राजदूत के बयान से संबंधित प्रश्न के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि डोकलाम पर अन्य देशों के साथ जारी कूटनयिक समन्वय के बारे में वह कोई ब्योरा नहीं दे सकते।

ज्ञात रहे कि जापान के राजदूत ने कहा था कि हम यह मानते हैं कि डोकलाम भूटान और चीन के बीच द्विपक्षीय विवादित क्षेत्र है जिसके बारे में दोनों पक्ष बात कर रहे हैं, लेकिन हम यह भी समझते हैं कि भूटान के साथ भारत की एक संधि है जिसके तहत भारतीय सेना इस क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है।

जापानी राजदूत के इस बयान पर भारत में खुशी जताई गई लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जापान के राजदूत को हम सचेत करना चाहते हैं कि वह तथ्यों को समझे बग़ैर हवा में बयान न दें, डोकलाम में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।