भारत ने बंद कीं रोहिंग्या मुसलमानों के लिए अपनी सीमाएं
म्यांमार के अत्याचारग्रस्त रोहिंग्या मुसलमानों को देश में दाखिल होने से रोकने के उद्देश्य से भारत ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
भारत के मिज़ोरम राज्य के लांगतलाई ज़िले और म्यांमार की आराकान सीमा पर असम राइफ़ल्स ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। एक अधिकारी का कहना है कि जब से सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई है उस समय से एक भी रोहिंग्या मुसलमान, भारत में प्रविष्ट नहीं हुआ है। अधिकारी का कहना है कि मज़ोरम की राज्य सरकार, वहां की पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ गुप्तचर विभाग के बीच इस बारे में वार्ता के कई चरण संपन्न हो चुके हैं।
ज्ञात रहे कि भारत के मिज़ोरम राज्य की 400 किलोमीटर से अधिक की सीमा म्यांमार से लगती है जबकि बांग्लादेश के मिज़ोरम की 318 किलोमीटर की सीमा मिलती है।
उल्लेखनीय है कि भारत की केंद्र सरकार ने इस देश के उच्चतम न्यायालय में म्यांमार के शरणार्थी रोहिंग्या मुसलमानों को देश के लिए ख़तरा बताया है। भारत सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने की योजना पर एक हलफ़नामा सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल किया है। हलफ़नामे में भारत की सरकार ने कहा कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से संपर्क हैं और इस स्थिति में वे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ख़तरा सिद्ध हो सकते हैं। हलफ़नामे में इसी तरह जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में रोहिंग्या शरणार्थियों के आतंकियों से संपर्क होने की भी गुप्त सूचना मिलने की भी बात कही गई है। भारत की केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि कई रोहिंग्या, मुसलमान मानव तस्करी में भी शामिल पाए गए हैं।
हालांकि रोहिंग्या मुसलमानों म्यांमार के सुरक्षाबलों और वहां के अतिवादी बौद्ध धर्म के मानने वालों के संयुक्त हमलों से बचने के लिए जिन देशों में शरण ले रखी है उनमें से किसी ने भी इस प्रकार की शिकायत रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में नहीं कही है।