किम से मोदी की तुलना
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हिंदुत्ववादी तत्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूरे दस साल के कार्यकाल में गालियां ही देते रहे उन्हें चोर और यहां तक कि नपुंसक कहा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct १७, २०१७ १६:२१ Asia/Kolkata
  • किम से मोदी की तुलना

हिंदुत्ववादी तत्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पूरे दस साल के कार्यकाल में गालियां ही देते रहे उन्हें चोर और यहां तक कि नपुंसक कहा।

मगर उस सज्जन इंसान ने बहुत सोची समझी ख़ामोशी और झुकी हुई नज़रों से इसका जवाब दिया। लेकि अब आप हिंदुत्व की निंदा करके देख लीजिए कि क्या होता है। पिछले सप्ताह कानपुर में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफत़ार कर लिया और 22 अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया सिर्फ़ इस बात पर कि उन्होंने एसा पोस्टर लगाया जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को कोरिया के शासक किम जोंग ऊन से जोड़ा गया था। पोस्टर में दोनों नेताओं के चित्र थे और लिखा था कि किम ने दुनिया को तबाह करने का फ़ैसला किया है और मोदी ने व्यापार को।

जो भी मोदी, उनके सहयोगी अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निदां करने की हिम्मत कर लेता है उसे कम से कम इस ख़तरे का तो सामना होता ही है कि सोशल मीडिया पर उसके ख़िलाफ़ गालियों की बरसात होगी। यदि आलोचना किसी महिला ने कर दी है तो उसे रेप की धमकी दी जाती है। यदि आलोचना करने वाला पुरुष है तो उसे बहन या मां के साथ रेप की धमकियां मिलती हैं।

दोनों ही स्थितियों में महिलाओं ही हिंदुत्वा के आक्रोश का निशाना बनती हैं। आलोचना करने वाले के ख़िलाफ़ क़ानूनी नोटिस भी जारी हो सकता है।

फ़ाशिस्ट वास्तव में फ़ाशिस्ट न बनते अगर वह आलोचना का जवाब आलोचना से देते। चरमपंथी हिंदू तत्वों का ख़तरा केवल गाली गलौज तक सीमित  नहीं है। कांग्रेस लीडर राहुल गांधी कहते हैं कि यह तत्व उन्हें और उनके परिवार को गालियां देते हैं, मैंने खुद भी जनसंघ के तत्वों को इंदिरा गांधी को गालियां देते सुना है।

इन लोगों ने इतनी गालियां दीं कि राहुल गांधी अपनी आंखें खोलने पर मजबूर हो गए। गांधी के स्पीच लेखक शायद बहुत मामूली हद तक ही समझ पाए हैं कि आम हिंदुस्तानी को इन फ़ाशिस्ट तत्वों के किस प्रकार के बर्ताव का सामना करना पड़ता है। वह दिन दहाड़े गौरी लंकेश और कलबुर्गी जैसे लेखकों की संदिग्ध हिंदुत्ववादी हमलावरों के हाथों हत्या का हवाला देने से बचते हैं। इसलिए राहुल गांधी को अवसरवादी कहना ग़लत नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार जावेद नक़वी के लेख के कुछ अंश