भारत और रूस ने द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार पर बल दिया
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भारत की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोज़िन से भेंटवार्ता में समस्त क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार पर बल दिया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २४, २०१७ १७:३१ Asia/Kolkata

भारत की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोज़िन से भेंटवार्ता में समस्त क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार पर बल दिया है।

भारत और रूस के मध्य स्ट्रैटेजिक संबंध काफी पुराने हैं परंतु मुख्य रूप से यह संबंध सैनिक क्षेत्रों में रहे हैं।

इसी कारण भारतीय सेना के अधिकांश हथियार रूसी हैं। जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है रूस के अलावा यूरोपीय संघ और अमेरिका से भी संबंध विस्तार की दिशा में गम्भीर कदम उठाये गये हैं।

अमेरिका ने भारत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने और उसके साथ सैनिक व परमाणु सहकारिता में विस्तार के लक्ष्य से नई दिल्ली के साथ समझौता कर रखा है इस प्रकार से कि वह रूस को चिंतित करे।

इन सबके बावजूद भारत रूस के साथ अपने संबंधों को कम नहीं करना चाहता।

रूसी विदेशमंत्रालय से संबंधित एक अध्ययनकर्ता ईगोर डेनीसोफ़ का मानना है कि भारत और रूस को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं से मुकाबले में समान चुनौतियों का सामना है और उन्हें इन समस्याओं के समाधान का प्रयास करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि इसके लिए शंघाई और ब्रिक्स जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों की संभावनाओं से लाभ उठाना चाहिये।

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत तीन वर्षों के दौरान हथियारों की खरीदारी से रूस के साथ अपने देश के संबंधों की सतह को उपर उठाने का प्रयास किया है। इस समय भारत की विकास दर पांच प्रतिशत से अधिक है जिसके दृष्टिगत उसे अच्छी मंडी की आवश्यकता है।

रूस के खिलाफ पश्चिम के प्रतिबंध के दृष्टिगत रूसी मंडिया भारतीय प्रभाव के लिए उपयुक्त स्थान हो सकती हैं और इस समय दोनों देशों के मध्य व्यापारिक लेन- देन कई बराबर हो गया है।

बहरहाल रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंध और चीन पर दबाव डालने के लिए अमेरिका को भारत की आवश्यकता है और इससे नई दिल्ली के लिए यह अवसर उपलब्ध हो गया है कि वह अधिक से अधिक मॉस्को के साथ अपने संबंधों को विस्तृत करे और यह एसा विषय है जो रूस को भी यह अवसर प्रदान करता है कि वह भारत के पारम्परिक प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को विस्तृत व मज़बूत करने की दिशा में कदम उठाये।

क्योंकि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध में तनाव उत्पन्न हो जाने के बाद से इस्लामाबाद रूस के साथ संबंध विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह वह नीति है जिससे भारत चिंतित हो गया है। MM