पाकिस्तानी सेना मोदी के चुनाव जीतने की दुआ क्यों मांग रही है?
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इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति है और दोनों देशों की जनता के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ़ दिखाई दे रही हैं। इसलिए कहा जाता है न, कि जिस युद्ध में बादशाह की जान को ख़तरा न हो उसको जंग नहीं राजनीति कहते हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २७, २०१९ १७:२८ Asia/Kolkata
  • पाकिस्तानी सेना मोदी के चुनाव जीतने की दुआ क्यों मांग रही है?

इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति है और दोनों देशों की जनता के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ़ दिखाई दे रही हैं। इसलिए कहा जाता है न, कि जिस युद्ध में बादशाह की जान को ख़तरा न हो उसको जंग नहीं राजनीति कहते हैं।

वैसे एक छोटे सीमित युद्ध में भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे पर निर्णायक जीत प्राप्त नहीं कर पाएंगे और भारत और पाकिस्तान के बीच यदि युद्ध होता है तो वह छोटा ही होगा क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इन दो परमाणु संपन्न देशों के बीच लंबा युद्ध होने नहीं देगा। एक और बात यह है कि चाहे भारत-पाक सीमा पर बढ़ता तनाव हो या एक दूसरे पर किए जाने वाले हमले हों इन सभी का संबंध कहीं न कहीं भारत में होने वाले आम चुनावों से भी है। भारत में हुए किसी भी हमले की व्याख्या चुनाव नहीं कर सकते हैं क्योंकि भारत में हमले होते रहे हैं, लेकिन जिस तरह का हमला पुलवामा में हुआ है उससे पता चलता है कि हमले को काफ़ी सोच-समझकर अंजाम दिया गया है।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सैन्यबलों को निशाना बनाया गया और यह बहुत ही भड़काने वाला हमला है क्योंकि भारतीय जनता अपनी सेना को लेकर बेहद भावुक हैं। भारत में आम लोगों के मारे जाने पर जनता उतना नहीं भड़कती है, जितना किसी सैनिक के मारे जाने पर भड़क उठती है। हमले में सीआरपीएफ़ को निशाना बनाया गया, यह अर्धसैनिक बल भारत के सबसे कम फ़ंड वाले बलों में से एक है, जो हमला किया गया वो बहुत ही वीभत्स था। जैशे मोहम्मद ने वर्ष 2000  के बाद से कोई आत्मघाती हमला नहीं किया था। 19 साल बाद यह हमला किया गया और इसका उद्देश्य ही भावनाएं भड़काना था, हमले का समय भी बेहद सोच-समझकर चुना गया और इसी वजह से हमें ऐसी भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

भारत के लोग भले यह न सुनना चाहें लेकिन सच यह है कि भारत के चुनावों में मोदी की जीत से सबसे ज़्यादा लाभ पाकिस्तान के डीप स्टेट अर्थात सेना को ही होता है। इसका कारण यह है कि पाकिस्तान में इस समय कई तरह के घरेलू दबाव हैं, सबसे बड़ी समस्या पख़्तून आंदोलन की है जो पाकिस्तान की अखंडता के लिए बड़ा ख़तरा है, बलोचिस्तान में चल रहा संघर्ष भी पाकिस्तान के लिए ख़तरा है, एक मज़बूत भारत की ओर से ख़तरा पाकिस्तान को आंतरिक तौर पर एकजुट करता है। अगर पाकिस्तान की दृष्टि से देखें तो कुछ चरमपंथियों का मारा जाना उसके रणनीतिक एजेंडे को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन भारत में मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हमला करना पाकिस्तानी डीप स्टेट की रणनीतिक ज़रूरतों से मेल ज़रूर खाता है।

भारत के कई टीकाकारों का कहना है कि पुलवामा हमले का समय और तरीक़ा भारतीय चुनावों में मोदी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हुआ लगता है, इससे पहले भारतीय चुनावों में मोदी की जीत सुनिश्चित नहीं थी लेकिन अब जो हालात हैं उनमें मोदी का जीतना लगभग तय है और यही पाकिस्तानी ख़ुफ़िया तंत्र चाहता है, क्योंकि एक मज़बूत भारत, ऐसा भारत जिससे पाकिस्तान डरे, पाकिस्तानियों में अधिक भय पैदा करता है और उन्हें पाकिस्तानी सेना के पीछे खड़ा कर देता है। दूसरी ओर भारतीय प्रधानमंत्री मोदी इस जटिल स्थिति में भी लगातार अपनी चुनावी रैलियां करते जा रहे हैं और हर रैली में वे इस बात का ज़रूर उल्लेख कर रहे हैं कि अगर वह भारत के प्रधानमंत्री पद पर बने रहे तभी यह देश सुरक्षित रहेगा वरना भारत की सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी। (रविश ज़ैदी)