समझौता एक्सप्रेस धमाके में असीमानंद सहित सभी चार आरोपी बरी
भारत में समझौता एक्सप्रेस धमाके के सभी आरोपियों को एनआईए की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है।
एनआईए की विशेष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता साबित नहीं कर पाया। बरी होने वालों में असीमानंद भी शामिल है।
समझौता एक्सप्रेस धमाका 18 फ़रवरी 2007 को हुआ था जिसमें 68 यात्री मारे गए थे। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस दिल्ली से चलकर भारत के आख़िरी स्टेशन अटारी की ओर बढ़ रही थी कि आधी रात के क़रीब यह ट्रेन हरियाणा के शहर पानीपत के दीवानी गांव के क़रीब पहुंची तो उसके एक कंपार्टमेंट में बम धमाका हुआ। धमाके में दो बोगियां आग की लपेट में आ गईं। इस घटना में 68 लोग मारे गए थे जिनमें अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक थे।
एनआईए ने इस मुक़द्दमें में स्वामी असीमानंद सहित कुछ कुछ हिंदू चरमपंथियों को आरोपी बनाया था। असीमानंद का संबंध एक चरमपंथी संगठन अभिनव भारत से बताया जाता है। इस मुक़द्दमे में कुल आठ आरोपी थे जिनमें से एक सुनील जोशी की वर्ष 2007 में हत्या कर दी गई जबकि तीन आरोपी संदीप डांगे, रामचंद्र, राम चंद्र कलसांग्रा और अमित अब भी फरार हैं।
इस लंबे मुक़द्दमे के लगभग 300 गवाह थे जिनमें से 30 से अधिक गवाह अदालती कार्यवाही के दौरान अपनी गवाही से मुकर चुके हैं।