अगर अब न जागे तो कब जागेंगे!!!
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कच्छ के वंध गांव के गड़ेरिया रानाभाई अहमदाबाद से 85 किलोमीटर सुंदरनगर ज़िले के रानागढ़ गांव में अपनी मरी हुयी भेड़ों के बीच खड़े हुए (बाएं) जलवायु परिवर्तन के ख़तरनाक अंजाम के संबंध में जागरुकता के लिए बच्चों का प्रदर्शन (दाएं)
450000 से ज़्यादा नागरिक दो पेटिशन पर दस्तख़त कर सरकार से जलवायु के संबंध में आपात स्थिति की घोषणा की मांग कर रहे हैं क्योंकि देश भीषण लू और पानी की अत्यधिक कमी से जूझ रहा है।
जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाने वाली स्वीडन की किशोर कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से प्रभावित 16 वर्षीय अमन शर्मा ने हर साल गर्मी, सूखे और और प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर ध्यान देने के बाद मई में चेन्जडॉटऑर्ग पर एक पेटिशन शुरु की।
अमन शर्मा ने शुक्रवार को टॉमसन रोयटर्ज़ संस्था से इस बात का उल्लेख करते हुए कि उनकी पेटिशन पर 170000 से ज़्यादा लोगों ने दस्तख़त किए हैं, कहाः "मैंने यह अभियान सरकार पर दबाव डालने के लिए शुरु किया है क्योंकि अगर हम अब ख़ामोश रहते हैं तो इससे भविष्य में हमारा वजूद प्रभावित होगा।"
उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय के सामने जो मांग रखी है उनमें देश में हरी पट्टी बढ़ाने और 2015 के पेरिस जलवायु समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना शामिल है।
पर्यावरण, जंगल और जलवायु मंत्रालय से इस बारे में बारंबार टिप्पणी के निवेदन के बावजूद उसने कोई टिप्पणी नहीं की है।
ग़ौरतलब है कि इस महीने के शुरु में चेन्नई उस समय चर्चा में आया जब उसके चार मुख्य जलाशय सूख गए। चेन्नई में 2018 में मानसून बहुत कम रहा जिसकी वजह से इस शहर के निवासी हर रोज़ पानी की निर्धारित मात्रा लेने पर मजबूर हुए।
चेन्नई भी उन 21 शहरों में शामिल है जिनके बारे में नीति आयोग ने पिछले साल एक रिपोर्ट में 2020 तक ज़मीनी जलस्रोत के सूखने के बारे में भविष्यवाणी की है।
मुंबई स्थित जितेन्द्र शर्मा ने भी इसी तरह की एक पेटिशन पिछले हफ़्ते शुरु की जिस पर शुक्रवार तक 300000 लोग दस्तख़त कर चुके थे।
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार जलवायु आपात स्थिति का एलान करेगी।
उन्होंने दूसरे देशों द्वारा इस तरह के क़दम उठाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय की ज़रूरत है।(MAQ/N)