सीएए को वापस लेने के लिए पोम्पियो पर दबाव
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अमरीकी सीनेटर बॉब मेनेन्डीज ने सीएए को वापस कराने के लिए माइक पोम्पियो को पत्र भेजा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १६, २०२० ०६:०७ Asia/Kolkata
  • सीएए को वापस लेने के लिए पोम्पियो पर दबाव

अमरीकी सीनेटर बॉब मेनेन्डीज ने सीएए को वापस कराने के लिए माइक पोम्पियो को पत्र भेजा है।

हिंदुस्तान के अनुसार अमरीकी सीनेट की विदेश नीति समिति के महत्वपूर्ण सदस्य सांसद बॉब मेनेन्डीज ने भारत में संशोधित नागरिकता कानून, सीएए और एनआरसी लागू कराने को लेकर चिंता प्रकट की है।  अमेरिका के एक शीर्ष सांसद ने इस देश के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ से अनुरोध करके भारत में सभी लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के वास्ते संशोधित नागरिकता कानून और प्रस्तावित एनआरसी को जल्द वापस लेने के लिए दबाव बनाने को कहा है। पोम्पिओ को लिखे गए एक पत्र में सांसद बॉब मेनेन्डीज ने भारत में संशोधित नागरिकता कानून, सीएए और एनआरसी लागू कराने को लेकर चिंता प्रकट की।

अपने पत्र में बॉब मेनेन्डीज ने लिखा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अमेरिका की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन से अनुरोध करता हूं कि इन चिंताओं के लिए उच्च स्तर पर भारत सरकार से बातचीत की जाए और इन नीतियों और नियमों की जल्द वापसी पर जोर दिया जाए और सभी धर्म के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने को कहा जाए।

मेनेन्डीज ने कहा कि धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करना, भारत की अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताओं और अपने ही संविधान का उल्लंघन है जो सबको समानता का अधिकार प्रदान करता है।  इस अमरीकी सांसद ने कहा कि भारत सरकार भले ही दावा कर रही है कि नागरिकता कानून धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है लेकिन इसमें पड़ोसी देशों में दमन का सामना करने वाले मुस्लिमों जैसे कि पाकिस्तान के अहमदिया समुदाय और म्यांमार के रोहिंग्या को शामिल नहीं किया गया है।  बॉब मेनेन्डीज ने  कहा कि इससे पता चलता है कि इसकी मंशा मुस्लिम विरोधी है।

मेनेन्डीज ने सीएए और भारत में प्रस्तावित एनआरसी को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौतों और घायलों की रिपोर्ट को लेकर भी चिंता प्रकट की है। एनआरसी का हवाला देते हुए अमरीकी सांसद ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने भारत की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने नागरिक संस्था के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी और उन लोगों ने इन नीतियों और भारत में लोकतंत्र के भविष्य पर इसके नकारात्मक असर को लेकर चिंता प्रकट की थी।