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हम बात बरेंगे अरीनल उसूद संगठन, उसके जांबाज़ों, शहीदों और क़रीब आ पहुंचे इंतेक़ाम की
Oct २६, २०२२ १६:५८सैकड़ों की संख्या में इस्राईली सैनिक और सुरक्षाकर्मी मंगलवार की सुबह वेस्ट बैंक के नाबलुस शहर पर टूट पड़े जहां उनकी भीषण झड़पें अरीनल उसूद संगठन के जांबाज़ों से हुई। झड़प में 33 लोग घायल हुए जो आम नागरिक थे।
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इस्राईल के 6 जासूसों की हत्या की कहानी, क्या इस्राईली जासूसी तंत्र के भीतर घुसे यह जासूस ईरान के एजेंट थे, ईरान दुश्मन मीडिया संस्थान ने कैसे न चाहते हुए जासूसों की हत्या की कर दी पुष्टि?
Oct २४, २०२२ १६:०३कई साल तक ईरान की संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति आयोग के प्रमुख रहे प्रतिष्ठित राजनेता अलाउद्दीन बुरुजर्दी ने एक इंटरव्यू में बड़ी महत्वपूर्ण बात कही जिसके पीछे एक लंबी कहानी छिपी है। बुरुजर्दी ने कहा कि इस्राईल की इंटेलीजेंस एजेंसियों की गतिविधियों पर ईरान गहरी नज़र रखता है और निगरानी के लिए उसके पास केवल गिने चुने एजेंट नहीं हैं कि उनके ख़त्म हो जाने से इस्राईली इंटेलीजेन्स एजेंसियों की गतिविधियों की निगरानी ख़त्म हो जाए।
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यूक्रेन युद्ध और अमरीका के ख़िलाफ़ यूरोपीय देशों ने खोल दिया मोर्चा, मैक्रां और उनके मंत्रियों ने संभाली है कमान, क्या पश्चिमी एलायंस चरमराने लगा है?
Oct २४, २०२२ १५:०९जैसे जैसे ऊर्जा का संकट बढ़ रहा है और सर्दी का मौसम नज़दीक आ रहा है अमरीका और उसके यूरोपीय घटकों के बीच मतभेद गहराता जा रहा है। ख़ास तौर पर जर्मनी और फ़्रांस जो ऊर्जा संकट और उसके आर्थिक दंश को झेल रहे हैं बहुत बुरी स्थिति में पहुंच गए हैं।
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अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है इस्राईल, अरीनल उसूद या शेरों का गढ़ नाम के फ़िलिस्तीनी संगठन के हमलों से कराहने लगा ग़ैर क़ानूनी शासन
Oct २४, २०२२ १२:५९हमारी एक मित्र जर्नलिस्ट हैं जो बर्लिन में काम करती हैं मुझे यह संदेश भेजा कि इन दिनों बर्लिन में जो चीज़ बहुत ज़्यादा नज़र आ रही है वह हालिया महीनों में सैकड़ों की संख्या में इस्राईलियों का जर्मनी पलायन है। इस्राईल की ख़तरनाक सुरक्षा स्थिति के कारण यह लोग वहां से भागकर जर्मनी में शरण ले रहे हैं। यह लोग ज़ायोनिस्ट मूवमेंट को बहुत बुरा भला कह रहे हैं जिसने उनके पूर्वजों के धोखा देकर फ़िलिस्तीन में बसने के लिए तैयार किया।
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जर्मनी में हुए ईरान विरोधी प्रदर्शन की सच्चाई, इस्लामी राष्ट्र के आगे दिखाई दी यूरोपीय देशों और अमेरिका की बेबसी!
Oct २३, २०२२ १३:४०शनिवार 22 अक्तूबर को जर्मनी की राजधानी बेर्लिन में यूरोपीय देशों और अमेरिका की बेबसी देखने को मिली। जब इन देशों को बेर्लिन की सड़कों पर समलैंगिकों, अलगाववादियों और पाखंडियों को ईरान के विरोध में उतारना पड़ा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मानवाधिकार का दावा करने वाले यह देश दूसरे देश में दंगा भड़काने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाए हुए हैं।
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क्या सल्मान रुश्दी की मौत हो गई?
Oct २३, २०२२ १२:३१सैटेनिक वर्सेज़ जैसी गुस्ताख़ाना किताब लिखने वाले सलमान रुश्दी की हमले के बाद अब क्या हालत है इस बारे में ख़बरों पर सेंसर लगा हुआ है। इसकी क्या वजह है यह तो पता नहीं लेकिन यह तो तय है कि पश्चिमी मीडिया के लिए इस चरित्रहीन लेखक का मुद्दा बड़ी अहमियत रखता है।
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अमेरिका की डूबती नाव से उतरने की कोशिश करता सऊदी अरब!
Oct २२, २०२२ १५:०५ओपेक प्लस समूह तेल उत्पादन में 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती की घोषणा कर पहले ही अमेरिका को बड़ा झटका दे चुका है। सऊदी अरब इस समूह का सबसे प्रमुख सदस्य है जो अमेरिका को और ज़्यादा नाराज़ करने की तैयारी कर रहा है।
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ईरानी ड्रोन विमानों पर हंगामा है क्यों बर्पा? क्या इस्राईली भी यूक्रेन जंग में कूदने वाला है? पुतीन का क्या होगा जवाब?
Oct २०, २०२२ ११:११ईरान के ड्रोन विमान इस समय पश्चिमी मीडिया में ख़ास तौर पर जबकि विश्व मीडिया में भी काफ़ी हद तक सुर्ख़ियों में छाए हुए हैं। मीडिया में यह हंगामा है कि ईरानी ड्रोन यूक्रेन युद्ध में रूस का बेहद ख़तरनाक हथियार साबित हो रहा है और उसने अचानक इस युद्ध में रूस को बड़ी मज़बूती दे दी है।
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क्या क्रीमिया को रूस से जोड़ने वाले पुल का धमाका पुतीन के लिए तोहफ़ा साबित हुआ? तीन तरह की जवाबी कार्यवाही कर सकता है रूस। यूक्रेन में रूसी फ़ोर्सेज़ के चीफ़ को बदलने के क्या हैं निहितार्थ?
Oct ०९, २०२२ १७:०८हमारी समझ में यह बात नहीं आई कि आठ महीने पहले शुरू होने वाली जंग के उसूलों को यूक्रेन ने इस समय क्यो तोड़ा और छापमार कार्यवाही के अंदाज़ में क्रीमिया के पुल पर भयानक धमाका करवाया। समुद्र के ऊपर बनाया गया यह पुल 9 किलोमीटर लंबा है। इससे कुछ ही दिन पहले नार्द स्ट्रीम गैस पाइपलाइन में धमाके हुए।
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हिज़्बुल्लाह प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने चार ड्रोन विमानों से अमरीका और इस्राईल दोनों को झुका लिया, क्या वर्तमान शांति तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी है?
Oct ०८, २०२२ १७:०२इस्राईल के प्रधानमंत्री याईर लपीद ने समुद्री सीमा निर्धारित किए जाने के मुद्दे पर लेबनान की ओर से चिन्हिंत किए गए मुद्दों को ख़ारिज कर दिया। इस ख़ाका अमरीकी दूत आमूस हाग्शटायन ने तैयार किया था। यानी उन्होंने समझौता करने से इंकार किया है और इस तरह अधिक समय हासिल करने की चाल चली है ताकि इस बीच लेबनान को इस्राईल की मांगों के सामने किसी तरह किसी हद तक झुकने पर तैयार किया जा सके।