ईश्वर और बंदे के बीच संवाद की शुरुआत का जश्न
https://parstoday.ir/hi/news/uncategorised-i57683-ईश्वर_और_बंदे_के_बीच_संवाद_की_शुरुआत_का_जश्न
इस्लाम धर्म के अनुसार जब बच्ची 9 साल की हो जाती है तो हराम-हलाल-वाजिब जैसे नियमों का पालन करना उसके लिए अनिवार्य हो जाता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb १३, २०१८ ०७:२५ Asia/Kolkata
  • ईश्वर और बंदे के बीच संवाद की शुरुआत का जश्न

इस्लाम धर्म के अनुसार जब बच्ची 9 साल की हो जाती है तो हराम-हलाल-वाजिब जैसे नियमों का पालन करना उसके लिए अनिवार्य हो जाता है।

अर्थात बच्ची अपने आयु के उस चरण में पहुंच चुकी है कि धार्मिक आदेशों के रूप में ईश्वर से उसका संवादा शुरू हो जाता है। ईरान में इसे जश्न के रूप में मनाया जाता है।

शीराज़ शहर के शाह चेराग़ धार्मिक स्थल पर इसी उपलक्ष्य में बड़ा शानदार जश्न मनाया गया।