लेबनान संकट में दिखाई देने लगा सऊदी अरब का हाथ
लेबनान के संचार माध्यमों ने लिखा है कि रियाज़ के दबाव के कारण ही साद हरीरी ने अपने क़दम पीछे हटा लिए।
अलआलम टीवी चैनेल की रिपोर्ट के अनुसार लेबनान के संचार माध्यमों का मानना है कि साद हरीरी का सत्ता से अलग होने का मुख्य कारण रियाज़ का वह दबाव है जो वह लेबनान की नई सरकार के गठन के संबन्ध में डाल रहा है।
इन संचार माध्यमों के अनुसार बहुत से लोग यह सोच रहे हैं कि आंतरिक मतभेदों के कारण साद हरीरी ने अपने अलग होने की घोषणा की है जबकि वास्तविकता यह हैे कि उन्होंने सऊदी अरब के दबाव के कारण यह काम किया है।
लेबनान के "अन्नबा" नामक समाचारपत्र ने इस देश में नए मंत्रीमण्डल के गठन की समीक्षा करते हुए लिखा है कि लेबनान के भीतर नए मंत्रीमण्डल के गठित न होने का मुख्य कारण विदेशी दबाव है। वास्तव में सऊदी अरब, लेबनान में नए मंत्रीमण्डल के गठन के कार्य में हस्तक्षेप कर रहा है और इसी विषय ने इस देश में नई सरकार के गठन में जटिलताएं पैदा कर दी हैं।
"अन्नशरा" वेबसाइट ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सऊदी अरब ने साद हरीरी के माध्यम से लेबनान के राष्ट्रपति को नकारात्मक संदेश भेजा है। रियाज़, लेबनान के नए मंत्रीमण्डल से हिज़्बुल्लाह सहित सारे ही प्रतिरोधक गुटों की भूमिका को समाप्त कराना चाहता है।
लेबनान में नए मंत्रीमण्डल के गठन के ज़िम्मेदार इस देश के प्रधानमंत्री साद हरीरी, 15 जूलाई को अपनी ज़िम्मेदारी से अलग हो गए थे। उन्होंने कहा था कि हम राष्ट्रपति महोदय के साथ सहयोग करने में अक्षम हैं जिसके कारण मंत्रीमण्डल के गठन की ज़िम्मेदारी से मैं स्वयं को अलग करता हूं।
याद रहे कि संयुक्त राष्ट्रसंघ और फ़्रांसीसी राष्ट्रपति की पहल पर पेरिस में 4 अगस्त को लेबनान के बारे में एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है।
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