सऊदी अरब और अरब इमारात अमेरिकी कठपुतली हैं" मोहम्मद अली अलहूसी
यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के वरिष्ठ सदस्य ने कहा है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात अमेरिकी कठपुतली हैं।
मोहम्मद अली अलहूसी ने कहा कि यमन की समस्त कठिनाइयों और युद्ध के पीछे अमेरिका है और सऊदी अरब और अरब इमारात उसके लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के मात्र हथकंडे हैं।
समाचार एजेन्सी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जहां भी कदम रखा वहां के लोगों को बर्बादी व विनाश उपहार में दिया। उन्होंने यमन के खिलाफ अमेरिकी सरकार के क्रियाकलापों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका सदैव डॉलर के मुकाबले में यमनी रियाल को आघात पहुंचाने की चेष्टा में रहा है।
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका सीरिया, लेबनान और फिलिस्तीन गया तो वहां के लोगों को विभिन्न प्रकार की सस्यायें व कठिनाइयां उठानी पड़ी और आज हमारे यमनी लोग भी अमेरिका के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
मोहम्मद अली अलहूसी ने क्षेत्र और विश्व जनमत में सऊदी गठबंधन की छवि को बेहतर दिखाये जाने के संबंध में किये जाने वाले प्रोपेगन्डे की ओर संकेत किया और कहा कि हमें यमन पर हमला करने वालों की सहायता की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम परिवेष्टन में हैं उसके बावजूद हम पर आरोप लगाया जाता है कि परिवेष्टन के पीछे हमारा हाथ है ताकि इस प्रकार वास्तविकता को उल्टा दिखाया जाये।
ज्ञात रहे कि सऊदी अरब और उसकी अगुवाई में बने गठबंधन ने 26 मार्च 2015 से यमन के खिलाफ हमला आरंभ किया था जो अब भी जारी है और उसके पाश्विक हमलों में अब तक दसियों हज़ार यमनी हताहत व घायल हो चुके हैं।
इसी प्रकार सऊदी अरब और उसकी अगुवाई में बने गठबंधन ने 6 वर्षों से अधिक समय से यमन का कड़ा ज़मीनी, समुद्री और हवाई परिवेष्टन कर रखा है जिसकी वजह से यमनी जनता को खाद्य पदार्थों और दवाओं सहित विभिन्न प्रकार चीज़ों की भारी कमी और विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना है। MM
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