यमन को लेकर अमरीका और अलक़ाएदा के बीच सांठगांठ
यमन के मआरिब क्षेत्र की निश्चित पराजय को देखते हुए अमरीका ने आतंकी गुट अलक़ाएदा के साथ एक डील की है।
यमनी सूत्रों ने बताया है कि मआरिब क्षेत्र में अंसारुल्लाह की प्रगति को रोकने और इस क्षेत्र को उनके हाथों से बचाने के लिए अमरीकी अधिकारियों ने हज़रमूत में अलक़ाएदा के तत्वों से भेंटवार्ता की है।
यमन की वेबसाइट अलअख़बारिया अलयमनिया ने गुरूवार को यमनी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमरीकियों ने अलक़ाएदा के तत्वों से कहा है कि अगर वे मआरिब की स्वतंत्रता को रुकवा देते हैं और इसे अंसारुल्लाह के हाथ नहीं लगने देंगे तो हम ग्वांतानामों बंदीगृह से अलक़ाएदा के कुछ तत्वों को आज़ाद करा देंगे।
सूत्रों ने बताया है कि कुछ दिन पहले यमन में अलक़ाएदा के मुख्य केन्द्र में कई अमरीकी सैनिक गए थे। उन्होंने यह दावा किया था कि वे अलक़ाएदा के विरुद्ध कार्यवाही करने के उद्देश्य से वहां पर गए थे किंतु बाद में पता चला कि उनका मुख्य उद्देश्य अलक़ाएदा के कमांडरों विशेषकर "ख़ालिद बातरफ़ी" से भेंटवार्ता करना था।
अमरीका और यूएई ने यमन के हज़रमूत क्षेत्र में अलक़ाएदा को आज़ाद छोड़ रखा है ताकि वहां पर मौजूद तेल को लूटा जा सके।
याद रहे कि यमन के स्वयंसेवियों और वहां की सेना ने मआरिब नगर और मआरिब प्रांत को मंसूर हादी के तत्वों से आज़ाद कराने के लिए पिछले कई महीनों से एक अभियान चला रखा है जिसके अन्तर्गत उन्होंने बहुत से क्षेत्रों को आज़ाद करा लिया है। अब वे मआरिब के निकट हैं और निकट भविष्य में उसको स्वतंत्र करवा सकते हैं।
यमनी सेना और स्वयं सेवी बल के जवानों ने पिछले सप्ताह के दौरान मआरिब प्रांत में घमासान की जंग के बाद कई अहम और बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। उन्होंने इस प्रांत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सऊदी गठबंधन के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया है।
उल्लेखनीय है कि यमन के मआरिब प्रांत में बहुत बड़ी मात्रा में तेल और गैस पाया जाता है इसलिए इसका विशेष आर्थिक महत्व है। जानकारों का कहना है कि मआरिब प्रांत के आज़ाद होने की स्थिति में मंसूद हादी की सरकार का बाक़ी रहना संभव ही नहीं है। यही कारण है कि उसको बचाने के लिए अमरीकी वहां पर हाथपैर मार रहे हैं।
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