लब्बैक या हुसैन की सदाओं से गुंज रही है करबला...
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इराक़ के पवित्र शहर कर्बला में सैय्यदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों का चेहलुम मनाया जा रहा है, जिसमें ईरान, इराक़, भारत, पाकिस्तान, और दुनिया भर से आए हुए करोड़ों श्रद्धालु मौजूद हैं, जो बहुत ही जोश और जज़्बे के साथ मातम कर रहे हैं और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा को उनके लाल का पुरसा दे रहे हैं। कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके बावफ़ा साथियों के चेहलुम में दुनिया के 60 देशों से लाखों लोग शरीक हुए हैं।
(last modified 2023-11-29T09:15:15+00:00 )
Sep १७, २०२२ ११:०२ Asia/Kolkata

इराक़ के पवित्र शहर कर्बला में सैय्यदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों का चेहलुम मनाया जा रहा है, जिसमें ईरान, इराक़, भारत, पाकिस्तान, और दुनिया भर से आए हुए करोड़ों श्रद्धालु मौजूद हैं, जो बहुत ही जोश और जज़्बे के साथ मातम कर रहे हैं और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा को उनके लाल का पुरसा दे रहे हैं। कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके बावफ़ा साथियों के चेहलुम में दुनिया के 60 देशों से लाखों लोग शरीक हुए हैं।

एक अंदाज़े के अनुसार इस समय कर्बला में लगभग तीन करोड़ अज़ादारों का मजमा है, और सड़कें और तमाम रास्ते हुसैनी परवानों से छलक रहे हैं, जिनमें 50 लाख ज़्यादा विदेशी ज़ायरीन भी मौजूद हैं। पाकिस्तान, हिंदुस्तान, लेबनान समेत दुनिया भर के दूसरे देशों से भी लाखों की तादाद में अज़ादार कर्बला में सैय्यदुश्शोहदा का चेहलुम मनाने कर्बला पहुंचे हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि अरबईन से पहले लगभग दो करोड़ तीर्थयात्री और श्रद्धालु कर्बला की ज़ियारत कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि तीर्थयात्री पैदल मार्च में शामिल होते हैं और फिर अपने घरों और शहरों की ओर लौट जाते हैं।

पवित्र नगर नजफ़ और इराक़ के दूसरे शहरों से पैदल सफ़र कर के ज़ायरीन कर्बला पहुंच रहे हैं, इराक़ के सबसे दूरस्थ इलाक़ों से मार्च तो बहुत पहले ही शुरु हो गया था। इस समय सिक्योरिटी के सख़्त इंतेज़ाम किए गए हैं और आतंकी संगठन दाइश की धमकियों और अहलेबैत के दुश्मनों की साज़िशों के बावजूद हुसैनी परवाने इस भव्य कार्यक्रम में पूरी ताक़त के साथ मौजूद हैं।

पूरे कर्बला का वातावरण लब्बैक या हुसैन की आवाज़ों से गूंज रहा है। इराक़ी मेज़बान तन मन और धन के साथ अपने मेहमानों का ख़याल रख रहे हैं। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि अरबईन मिलियन मार्च और चेहलुम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की हिफाजत के लिए 35000 से अधिक सिक्योरिटी बलों को तैनात किया गया है जो पूरी मेहनत एवं जागरुकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रही है।

इधर ईरान के विभिन्न प्रांतों में भी कर्बला न पहुंच पाने वालों के मार्च और जूलस निकाल जा रहे हैं। तेहरान का केन्द्रीय मार्च इमाम हुसैन स्क्वायर से सुबह नौ बजे शुरु हुआ। यह मार्च रै शहर में स्थित शाह अब्दुल अज़ीम अलैहिस्सलाम के रौज़े तक जाता है। इस मार्च में तेहरान और इसके आसपास के शहरों तथा क़ुम तक के लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है। इराक़ के अंदाज़ में यहां पर भी जगह जगह मौकिब लगाए गये हैं और लोगों के खाने पीने और अनेक तरह की सुविधाओं का प्रबंध किया गया है।

पिछले कई वर्षों से दुनिया के दूर और नज़दीक के देशों से बड़ी संख्या में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चाहने वाले और श्रद्धालु अरबईन मिलियन मार्च में शामिल होने के लिए कर्बला पहुंचते हैं। यह मिलियन मार्च किसी एक धर्म, जाति और समुदाय से विशेष नहीं है, यहां सुन्नी मुसलमान भी मिलेगा, ईसाई भी अपनी श्रद्धा के सुमन अर्पित करता नज़र आएगा और हिन्दु भी अपनी सेवाएं अंजाम देता दिखेगा। यह हुसैनी दरबार है यहां इंसानियत सिखाई जाती है, यहां एक दूसरे से प्रेम और स्नेह का पाठ सिखाया जाता है।

अरबईन मिलियन मार्च की रिवायत सदियों पुरानी है और पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों से श्रद्धा रखने वाले सदियों से अरबईन के मौक़े पर नजफ़ से कर्बला तक पैदल चलते थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस मार्च ने अंतर्राष्ट्रीय शक्ल अपना ली है और दुनिया का शायद ही कोई देश होगा जहां से तीर्थयात्री और श्रद्धालु अरबईन मिलियन मार्च में शामिल नहीं होते हों।

इराक़ियों के साथ साथ ईरान, भारत, पकिस्तान, कुवैत, सऊदी अरब, बहरैन और लेबनान के भी श्रद्धालु और शिया मुसलमान तीर्थयात्रियों की सेवाओं के लिए मौकिब लगाते हैं। ईरान के पड़ोसी देशों, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, आज़रबाइजान गणराज्य, तुर्की और अन्य देशों के दसियों हज़ार तीर्थयात्री ईरान के रास्ते कर्बला रवाना हुए हैं जिनके लिए जगह जगह मौकिब बनाए गये और उनके रहने और खाने पीने का प्रबंध किया गया है।