इस्राईल में इस्लामोफ़िया की नई लहर
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इस्लामोफ़ोबिया की जारी योजना के अंतर्गत इस बार अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में कट्टरपंथी ज़ायोनियों ने पवित्र क़ुरआन की कई प्रतियों को आग लगा दी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct ११, २०२२ ०९:५८ Asia/Kolkata

इस्लामोफ़ोबिया की जारी योजना के अंतर्गत इस बार अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में कट्टरपंथी ज़ायोनियों ने पवित्र क़ुरआन की कई प्रतियों को आग लगा दी।

अलख़लील शहर के इस्लामी वक़्फ़ बोर्ड के निदेशक नेज़ाल अलजाबरी ने कहा कि कट्टरपंथी ज़ायोनियों ने अलख़लील शहर के एक पुराने हिस्से में हरमे इब्राहिमी के पास क़ैतुन मस्जिद में पवित्र कुरआन की कई प्रतियां जला दीं।

कुछ पश्चिमी देशों के साथ अतिग्रहित क्षेत्रों में भी विभिन्न शक्लों में  इस्लामोफ़ोबिया या इस्लाम से जंग का सिलसिला जारी है। वास्तव में इस्लाम का विरोध, पश्चिम की ठोस नीतियों में से एक है। इस नीति को साकार करने के लिए, दुश्मनों ने विभिन्न परिदृश्यों को तैयार और लागू किया है।

मुसलमानों पर आतंकवादी कार्यवाहियों में लिप्त होने का आरोप लगाना या इस्लामी धर्म पर हिंसा का समर्थन करने का आरोप लगाना, इस्लाम धर्म और इस्लाम के प्रिय पैगम्बर के बारे में अपमानजनक चीज़ें प्रकाशित करना, पवित्र क़ुरआन का अपमान व अनादर करना, इस्लामी शिक्षाओं और संस्कारों का अपमान करना, इस्लाम विरोधी प्रवचनों का प्रचार, कट्टरपंथी हथियारबंद गुटों को इस्लामी रूप देना, उन्हें प्रशिक्षण देना और उन्हें आधुनिक व विकसित हथियारों लैस करना, बड़े स्तर पर मीडिया का दुरुपयोग, इस्लाम विरोधी तरीकों में से हैं जो अक्सर पश्चिमी देशों के अधीन क्षेत्रों में भी किए जाते हैं। इसके साथ ही युवा पीढ़ी में इस्लाम के आकर्षण को कम करना और इस्लामी मूल्यों व मान्यताओं का अपमान व अनादर करना, इस्लामोफ़ोबिया के अन्य तरीक़े हैं।  

अतिग्रहित क्षेत्रों में भी इस्लामोफ़िया बढ़ रहा है और ज़ायोनी अधिकारियों और ज़ायोनी बस्तियों के निवासियों को इस्लामोफोबिया को आगे बढ़ाने में किसी भी रुकावट का सामना नहीं है।

दूसरे शब्दों में, कई अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेजों के अनुसार, धर्मों और उनके अनुयायियों का सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का अटूट हिस्सा है लेकिन ज़ायोनी बिना किसी चिंता के इस्लाम, मुसलमानों और पवित्र क़रआन के का अपमान करते हैं।

फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी के एक वरिष्ठ नेता ख़िज़्र अदनान पवित्र क़ुरआन के अनादर और ज़ायोनियों द्वारा इसकी कई प्रतियों को जलाने पर प्रतिक्रिया में कहते हैं कि इस अपराध ने सर्वोच्च धर्म और बड़े आसमानी संदेश को निशाना बनाया। उन्होंने पश्चिमी देशों की चुप्पी की भी आलोचना की और कहा कि हम उन ज़बानों की चुप्पी की निंदा करते हैं जो हमेशा इबादत की स्वतंत्रता के लिए चिल्लाती रहती हैं और अब वे इस घिनौने अपराध के बारे में आवाज नहीं उठा रही हैं। (AK)

 

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