क्या नेतनयाहू इस्रईल को तानाशाही की ओर ले जा रहे हैं?
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इस्राईल में एक बड़ीं संख्या में लोगों ने ज़ायोनी प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू की नई दक्षिपंथी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १६, २०२३ १३:४३ Asia/Kolkata
  • क्या नेतनयाहू इस्रईल को तानाशाही की ओर ले जा रहे हैं?

इस्राईल में एक बड़ीं संख्या में लोगों ने ज़ायोनी प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू की नई दक्षिपंथी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है।

यह प्रदर्शन अवैध क़ब्ज़े वाले इलाक़ों और शहरों जैसे कि तेल-अवीव और हैफ़ा में आयोजित हुए। प्रदर्शनकारियों ने जहां नई दक्षिणपंथी ज़ायोनी सरकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा ख़तरा बताया, वहीं इस सरकार पर न्यायिक व्यवस्था को सीमित करने का आरोप लगाया।

नेतनयाहू की कैबिनेट में न्यायपालिका मंत्री यारयू लोविन ने ज़ायोनी न्याय व्यवस्था में सुधारों के नाम पर एक नई योजना पेश की है, जिसका मूल उद्देश्य न्यायपालिका के अधिकारों को पहले से भी अधिक सीमित करना है।

इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद इस्राईल के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार सीमित हो जायेंगे। इसके बाद चीफ़ जस्टिस की नियुक्ति पर पूरी तरह से सरकार का कंट्रोल हो जाएगा, दूसरी ओर कैबिनेट द्वारा लिए गए फ़ैसलों को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार बहुत हद तक सीमित हो जाएगा। क्योंकि नेसेट को यह अधिकार होगा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए क़ानून को वह सिर्फ़ 61 वोटों से बहाल कर दे। इस तरह से इस प्रस्ताव के पारित होने से अलग अलग पालिकाओं के अधिकार ख़त्म हो जायेंगे और न्यायपालिका के मुक़ाबले में संसद और सरकार का वर्चस्व बढ़ जाएगा।

इससे ज़ायोनी शासन की कमज़ोर न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी। इसका एक मक़सद उन मंत्रियों को भी क़ानून की पहुंच से बचाना है, जिनके ख़िलाफ़ अदालतों में मुक़दमे चल रहे हैं। ख़ुद नेतनयाहू और उनके कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे आरोपों में मुक़दमे चल रहे हैं। विरोधियो का कहना है कि इस प्रस्ताव का मक़सद, नेतनयाहू और उनके मंत्रियों को बचाना है। जबकि इसके पारित होने से न्यायपालिका की स्वाधीनता पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगी और फिर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार और अपराधों को निंयत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।

एक दूसरा महत्वपूर्ण बिंदू यह है कि इस्राईल में नेतनयाहू सरकार के आलोचकों और विरोधियों का मानना है कि इस प्रस्ताव के पारित होने से इस्राईल में रहा सहा लोकतंत्र भी ख़त्म हो जाएग और ज़ायोनी शासन तानाशाही की तरफ़ बढ़ जाएगा।

इस संदर्भ में फ़्रांस प्रेस न्यूज़ एजेंसी ने लिखा है कि प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में ऐसे प्लेकॉर्ड उठा रखे थे, जिन पर सरकार शर्म करो, हम तानाश का पतन चाहते हैं, नेतनयाहू लोकतंत्र का दुश्मन है और हमें फासीवादी नेता की ज़रूरत नहीं है।