फ़िलिस्तीन के प्रतिरोध गुटों से इस्राईल की नींद हुई हराम....
फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास की सैन्य शाखा अल-क़स्साम ब्रिगेड से संबद्ध "अक़बा जब्र कैंप बटालियन" के रूप में जाना जाने वाले एक प्रतिरोध समूह ने अरीहा शहर में अपनी मौजूदगी का एलान किया।
पिछले साल फ़िलिस्तीनी शहरों में नए प्रतिरोध गुटों का उदय, ज़ायोनी शासन के लिए एक दुःस्वप्न बन गया। अरीन अल-उसूद नब्लस में बने सबसे महत्वपूर्ण समूहों में से एक है।
पिछले एक साल में इस प्रतिरोध समूह ने ज़ायोनियों के ख़िलाफ अधिकांश ऑप्रेशनों को अंजाम दिया जिसमें अतिग्रहित क्षेत्रों के अंदर के इलाक़े भी शामिल हैं।
अरीन अल-उसूद के गठन का अर्थ, वेस्ट बैंक का आंदोलन की ओर बढ़ना था। अब वेस्ट बैंक के अरीहा इलाक़े में अल-क़स्साम की एक बटालियन की स्थापना हो गयी है। अरीह में इस बटालियन की स्थापना महत्वपूर्ण है क्योंकि अतीत में अरीहा को आक्रमणकारियों के लिए वेस्ट बैंक में एक शांतिपूर्ण शहर के रूप में जाना जाता था।
इसके अलावा, अरीहा में एक बटालियन का गठन, ज़ायोनियों के ख़िलाफ इस शांतिपूर्ण शहर के ग़ुस्से को दर्शाता है क्योंकि यह शहर पिछले दो हफ़्तों से ज़ायोनी सैनिकों द्वारा घेराव में है।
अरीहा के मेयर अब्दुल करीम सद्र ने कहा कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन के मंत्रिमंडल ने अरीहा शहर घेराव जारी रखा है और इसके निवासियों, विशेष रूप से अक़बा जब्र कैंप के नागरिकों के खिलाफ सामूहिक दंड की नीति अपनाए हुए है और इस किसानों की मौसमी फ़सलों को बहुत नुकसान हो रहा है।
अक़बा जब्र कैंप ब्रिगेड" के रूप में जाना जाने वाले प्रतिरोध समूह का गठन, पहले चरण में बैतुल मुक़द्दस के अतिग्रहणकारी शासन के लिए एक विफलता थी क्योंकि यह बटालियन वीरतापूर्वक विरोध करने और ज़ायोनी सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर करने में सक्षम थी।
ज़ायोनी शासन के लिए सबसे गंभीर हार यह थी कि "अक़बा जब्र कैंप बिग्रेड" नामक एक प्रतिरोध समूह का गठन, इस शासन के लिए एक बड़ी खुफिया और सुरक्षा विफलता और थी क्योंकि इसका मतलब वेस्ट बैंक में प्रतिरोध के दायरे का विस्तार होना था।
इस तथ्य के बावजूद है कि कुछ समय पहले, ज़ायोनी खुफिया सेवाओं ने नाब्लस में अरीन अल-उसूद ब्रिगेड और जेनिन कैंप बटालियन को नष्ट करने का वादा किया था, लेकिन न केवल वे इस संबंध में विफल रहे, बल्कि उन्हें इस बार अरीहा में एक नये और शक्तिशाली प्रतिरोध गुट के गठन का सामना करना पड़ा है।
इस्राईली मामलों के एक विशेषज्ञ रजाई अल-करकी का कहना है कि अरीहा में अल-क़स्साम ब्रिगेड की उपस्थिति, इस्राईली सुरक्षा प्रणाली के लिए एक मजबूत झटका है जिसने लंबे समय से दावा कर रखा है कि वह प्रतिरोध समूहों को नष्ट कर सकता है। (AK)
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