इस्राईल की मुसीबतें बढ़ीं, अफ़्रीक़ी संघ ने झाड़ा पल्ला
अफ़्रीक़ी संघ के 55 सदस्यों ने संघ के सदस्यों से ज़ायोनी शासन के साथ अपने संबंधों को समाप्त करने और इसे एक साम्राज्यवादी शक्ति क़रार देने की मांग की है।
इस संबंध में फ़िलिस्तीनियों के साथ ज़ायोनी शासन के दुर्व्यवहार के कारण दक्षिणी अफ़्रीक़ा के सांसद, इस्राईल के साथ राजनयिक संबंधों के स्तर को कम कर सकते हैं।
अफ़्रीक़ी संघ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सदस्य देशों को एक ग़ैर क़ानूनी और अवैध शासन के रूप में ज़ायोनी शासन को मान्यता नहीं देनी चाहिए जिसने अवैध अधिकृत पूर्वी बैतुल मुक़द्दस सहित फ़िलिस्तीन और अरब क्षेत्रों में एक साम्राज्यवादी और नस्लभेदी व्यवस्था बना रखी है।
यह अपील अफ़्रीक़ी संघ के शिखर सम्मेलन से ज़ायोनी प्रतिनिधिमंडल के निष्कासन के बाद की गयी है। पिछले हफ़्ते, अफ़्रीक़ी संघ के शिखर सम्मेलन के सुरक्षा अधिकारियों ने शिखर सम्मेलन हॉल से दूसरे लोगों के प्रवेश कार्ड का उपयोग करने वाले इस्राईली प्रतिनिधिमंडल को निकाल दिया था, इस्राईल का यह प्रतिनिधिमंडल तेल अवीव से आदिस अबाबा शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आया था।
ज़ायोनी शासन के प्रतिनिधिमंडल का निष्कासन यह साबित करता है कि यह शासन न केवल यह दावा नहीं कर सकता है कि वह अफ़्रीक़ी संघ का पर्यवेक्षक सदस्य बनने में सफल रहा है, बल्कि इसके विपरीत, इस प्रतिनिधिमंडल को निष्कासित करने की प्रक्रिया से पता चलता है कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन को अफ़्रीक़ी संघ द्वारा खारिज कर दिया गया।
ज़ायोनी शासन ने इस कार्रवाई की निंदा की है और दक्षिणी अफ़्रीक़ा और अल्जीरिया पर राजनयिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। अफ़्रीक़ी संघ ने घोषणा की कि वह इस तथ्य को स्वीकार नहीं करता है कि ज़ायोनी शासन ने अपने प्रतिनिधिमंडल के निष्कासन को चौंकाने वाला क़दम क़रार दिया है।
इससे पहले, आदिस अबाबा में अफ़्रीक़ी संघ की बैठक से ज़ायोनी प्रतिनिधिमंडल के निष्कासन के बाद, इस संघ के आयोग ने बैठक में भाग लेने के लिए ज़ायोनी शासन के प्रतिनिधि के किसी भी निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था।
अफ़्रीक़ी संघ आयोग के प्रमुख मूसा मोहम्मद ने कहा कि पिछले साल अफ़्रीक़ी संघ के नेताओं की बैठक ने इस संघ में एक पर्यवेक्षक सदस्य के रूप में इस्राईल की स्थिति को ख़त्म कर दिया और इस मुद्दे से निपटने के लिए देशों के प्रमुखों की एक समिति बनाई गई। उन्होंने बल दिया कि इसका मतलब यह है कि जब तक यह समिति इस पर चर्चा करती है, स्थिति लंबित रहेगी, इसलिए हमने अपनी बैठक में भाग लेने के लिए ज़ायोनी शासन के किसी भी राजनयिक को आमंत्रित नहीं किया है।
विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सईद सादिक़ कहते हैं कि अफ़्रीक़ी संघ के कुछ सदस्य, ज़ायोनी शासन के साथ द्विपक्षीय संबंध होने के बावजूद, उसके अतिग्रहण के ख़िलाफ़ हैं, वे फिलिस्तीनियों की हत्या के खिलाफ हैं, ज़ायोनी शासन लंबे समय से फ़िलिस्तीनियों को मार रहा है। यद्यपि ज़ायोनी शासन की सदस्यता पर एक पर्यवेक्षक सदस्य के रूप में सहमति हुई थी लेकिन अल्जीरिया और दक्षिणी अफ़्रीक़ा ने जो नस्लवाद से पीड़ित हैं, इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताई और वह इसको अपने लिए अपमान समझते हैं। (AK)
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