इस्राईल ने मात्र कुछ ही घंटों में युद्धविराम क्यों कर लिया?
संचारिक माध्यमों ने मिस्र और क़तर की मध्यस्थता से ग़ज़्ज़ा पट्टी में सशर्त युद्धविराम की सूचना दी है।
फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों और जायोनी शासन के मध्य लड़ाई आरंभ होने के कुछ घंटे बाद सशर्त युद्धविराम हो गया। एक फिलिस्तीनी बंदी खिज़्र अदनान 86 दिनों की भूख हड़ताल के बाद शहीद हो गये जिससे फिलिस्तीनी जनता और फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों का क्रोध फूट पड़ा है। फिलिस्तीनी बंदी की शहादत के बाद फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों और जायोनी शासन के बीच युद्ध आरंभ हो गया था पर युद्ध आरंभ होने के मात्र कुछ ही घंटे बाद संचारिक माध्यमों ने बुधवार की सुबह को सशर्त युद्धविराम की सूचना दी।
क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनल ने फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों और जायोनी शासन के मध्य सशर्त युद्धविराम की सूचना दी। फिलिस्तीनी बंदी ख़िज़्र अदनान की शहादत के बाद फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों ने जायोनी कस्बों की ओर कुछ राकेट फायर किये थे जिसके बाद इस्राईल के युद्धक विमानों ने ग़ज़्ज़ा पट्टी और उसके आसपास के क्षेत्रों पर बमबारी की थी। जायोनी समाचार पत्र मआरियो ने आज दावा किया कि जो लड़ाई मंगलवार की सुबह से आरंभ हुई थी उसमें ग़ज़्ज़ा पट्टी की ओर से जायोनी कस्बों की ओर 70 से अधिक राकेट फायर किये गये।
जायोनी शासन के टीवी चैनल नंबर 12 ने एलान किया है कि फिलिस्तीनियों के राकेट हमलों की मारक क्षमता में वृद्धि हो रही है और यह पहली बार है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी से 23 किलोमीटर की दूरी स्थित मरहाविम क्षेत्र को निशाया बनाया गया। इन हमलों में कम से कम 7 जायोनी घायल हो गये जबकि अभी इस्राईली हमलों में घायल व शहीद होने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या ज्ञात नहीं है।
फिलिस्तीन के हमास संगठन के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख और फिलिस्तीन के पूर्व प्रधानमंत्री इस्माईल हनिया ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में होने वाले अपराधों के लिए जायोनी शासन को ज़िम्मेदार बताया है।
सवाल यह पैदा होता है कि जायोनी शासन ने क्यों मात्र कुछ ही घंटे में युद्धविराम कर लिया? जबकि इससे पहले इस्राईल ने कई- कई दिनों के हमलों के बाद युद्धविराम किया है? इसके जवाब में जानकार हल्कों का कहना है कि कुछ सालों या कुछ महीनों पहले की स्थिति आज की स्थिति से बहुत भिन्न थी। कुछ साल पहले फिलिस्तीनी, हर प्रकार के आधुनिकतम हथियारों से लैस जायोनी सैनिकों के पाश्विक हमलों का जवाब पत्थरों से देते थे पर आज वही फिलिस्तीनी इस्राईल के पाश्विक हमलों का जवाब राकेटों और मिसाइलों से दे रहे हैं।
रोचक बात यह है कि जायोनी शासन ने कई वर्षों से ग़ज़्ज़ा पट्टी का कड़ा परिवेष्टन भी कर रखा है उसके बावजूद फिलिस्तीन के प्रतिरोधक गुटों की शक्ति में दिन दूनी रात चौगुनी की तरक्की व वृद्धि हो रही है। अपनी मातृभूमि और मुसलमानों के पहले किबले मस्जिदुल अक्सा की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले फिलिस्तीनी गुटों के राकेटों और मिसाइलों ने बता दिया है कि इस्राईल के प्रतिबंधों से न तो फिलिस्तीनी कमज़ोर हुए हैं और न ही उनके मनोबल पर कुछ प्रभाव पड़ा है।
यही नहीं फिलिस्तीनी न केवल लेशमात्र हतोत्साहित नहीं हुए हैं बल्कि उनके मनोबल में असाधरण व ध्यानयोग्य वृद्धि हो गयी है और इस बीच जो कमज़ोर व हतोत्साहित हुआ है और जिसका मनोबल टूट गया है वह इस्राईल है। कुछ ही घंटों तक चलने वाले युद्ध में संघर्षविराम के लिए इस्राईल के तैयार हो जाने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM