इस्लामिक रेज़िस्टेंस की ईद, क़ाबिज़ इस्राईल का डरावना ख़्वाब
दक्षिणी लेबनान पर 18 साल तक जारी रहने वाला क़ब्ज़ा ख़त्म करके वहां से इस्राईली सेना के फ़रार की एतिहासिक घटना को 23 साल पूरे हो चुके हैं। यह वाक़या 25 मई 2000 को हुआ था जो इस्राईल और उसके समर्थकों के मुक़ाबले में डटे हुए रेज़िस्टेंस फ़्रंट की ईद का दिन है।
हर साल लेबनान में इस्लामी प्रतिरोध फ़्रंट की ओर से इस दिन ख़ास समारोह मनाया जाता है क्योंकि यह ज़ायोनी शासन की शिकस्तों की शुरुआत का दिन भी है।
इस साल इस जश्न के अवसर पर हिज़्बुल्लाह ने सैन्य अभ्यास का आयोजन किया जिससे इस समारोह में एक नया अध्याय जुड़ गया है और दूसरी ओर ज़ायोनी शासन की बेचैनी कई गुना बढ़ गई।
हिज़्बुल्लाह ने इस वर्षगांठ से कुछ दिन पहले स्थानीय और विदेशी मीडिया की मौजूदगी में बहुत वैभवशाली सैन्य अभ्यास किया और अपनी सैन्य क्षमताओं के अलग अलग आयामों की झलक दिखाई।
इस सैन्य अभ्यास का नाम रखा गया था हम पार करेंगे, हम पार कर रहे हैं। यह क़ाबिज़ इस्राईल के लिए बहुत बड़ा संदेश है।
650 से अधिक मीडिया कर्मियों ने इस पूरे इवेंट को कवर किया और पूरी दुनिया में हिज़्बुल्लाह के सैन्य अभ्यास का चर्चा रहा। इस सैन्य अभ्यास को बहुत से लोग हिज़्बुल्लाह की तरफ़ से इस्राईल के लिए चेतावनी मानते हैं जबकि यह भी सच्चाई है कि सैन्य अभ्यास में हिज़्बुल्लाह ने अपनी शक्ति के छोटे भाग का प्रदर्शन किया है।
कुछ सप्ताह पहले अमरीका की बाइडन सरकार ने एक हास्यास्पद बयान दिया कि अगर इस्राईली सरकार ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करती है तो अमरीका इस हमले को रोकने की कोशिश नहीं करेगा। इस बयान के बाद हिज़्बुल्लाह के सैन्य अभ्यास से यह संदेश गया कि इस्राईल के लिए बहुत अच्छा होगा कि छोटी सी ग़लती करने की भी हिम्मत न करे।
हिज़्बुल्लाह के इस सैन्य अभ्यास ने इस्राईल में हर साल आयोजित होने वाली हर्तज़ेलिया कान्फ़्रेंस को बुरी तरह प्रभावित किया। इस सम्मेलन में इस्राईल आइंदा एक साल के लिए सामरिक रणनीति तय करता है मगर इस बार सम्मेलन हिज़्बुल्लाह के सैन्य अभ्यास का मुद्दा छाया रहा।
यह इस्राईल की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कान्फ़्रेंस होती है जिसमें इस्राईल के समक्ष उत्पन्न सुरक्षा ख़तरों की समीक्षा की जाती है।
इस सुरक्षा सम्मेलन में ज़ायोनी शासन के सुरक्षा अधिकारी और बड़े नेता भाग लेते हैं। इस समय इस सम्मेलन में इस्रामल के तीन बड़े सुरक्षा अधिकारियों ने हिज़्बुल्लाह के सैन्य अभ्यास की बात की। इसके साथ ही सऊदी अरब से ईरान के महत्वपूर्ण समझौते, फ़ार्स खाड़ी के देशों के साथ ईरान के संबंधों और मिस्र से ईरान के प्रस्तावित समझौते की बातें भी मुख्य रूप से चर्चा में रहीं।
ज़ायोनी टीकाकारों का कहना है कि हिज़्बुल्लाह के सैन्य अभ्यास से इस्राईल को यह महत्वपूर्ण संदेश गया है कि इस्राईल के मुक़ाबले में सक्रिय रेज़िस्टेंस फ़्रंट की सभी फ़ोर्सेज़ के बीच बहुत मज़बूत एकता पायी जाती है और यह फ़्रंट लेबनान, फ़िलिस्तीन, यमन, सीरिया, इराक़ सहित पूरे इलाक़े में फैला हुआ है।
यह इस्राईल के लिए बहुत बड़ा डरावना ख़्वाब है।
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