अगली जंग में अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में दाखिल हो जायेंगेः हिज़्बुल्लाह
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दक्षिणी लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह की कार्यकारी परिषद के प्रमुख ने कहा है कि अगले युद्ध में अवैध अधिकृत फिलिस्तीन में दाखिल हो जायेंगे।
(last modified 2023-06-14T05:59:37+00:00 )
Jun १४, २०२३ ११:२७ Asia/Kolkata

दक्षिणी लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह की कार्यकारी परिषद के प्रमुख ने कहा है कि अगले युद्ध में अवैध अधिकृत फिलिस्तीन में दाखिल हो जायेंगे।

सैयद हाशिम सफियुद्दीन ने एक साक्षात्कार में कहा कि लेबनानियों ने प्रतिरोध पर भरोसा करके जायोनी शासन को पराजित कर दिया जबकि इस शासन की सेना आधुनिकतम हथियारों से लैस है और 6 दिवसीय युद्ध में उसने कई अरब देशों को हरा दिया था। उन्होंने कहा कि जायोनी शासन के साथ 22 दिवसीय, 8 दिवसीय, 51 दिवसीय और 12 दिवसीय युद्ध में हिज़्बुल्लाह को जो सफलतायें मिलीं उसने जायोनी शासन की खोखली ताकत को पहले से अधिक स्पष्ट कर दिया।

उन्होंने समाचार तसनीम के साथ साक्षात्कार में सबसे पहले ईरान की इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम खुमैनी रह. जनरल कासिम सुलैमानी और दूसरे शहीदों पर सलाम व दुरूद भेजा और कहा कि जैसाकि आप जानते हैं कि आजकल जायोनी शासन से दक्षिणी लेबनान की आज़ादी के दिन हैं और लेबनान के लोग आज़ादी का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्राईल हमेशा यह कहता है कि 6 दिवसीय जंग में उसने कई अरब देशों को हरा दिया था जबकि इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह ने 25 मई 2000 को इस्राईली सेना को पराजय का कटु स्वाद चखाया था।

जानकार हल्कों का मानना है कि जंग में विजयी होने के लिए ऊंचा मनोबल हथियारों के आधुनिकतम होने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दूसरे शब्दों में जंग में विजयी होने के लिए हथियारों का आधुनिकतम होना काफी नहीं है। सवाल यह पैदा होता है कि इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह और फिलिस्तीन के संघर्षकर्ता गुटों के हथियार आज भी इस्राईल के मुकाबले में उतने प्रभावी नहीं हैं जितने इस्राईल के हैं और इस्राईल के पास बहुत सारे एसे हथियार हैं जो न तो हिज़्बुल्लाह के पास है और न ही फिलिस्तीनी गुटों के पास, फिर भी जायोनी सैनिकों के मुकाबले में प्रतिरोधक गुटों के हौसले बहुत बुलंद हैं, एसा क्यों है इसकी वजह क्या है?

इसके जवाब में जानकार हल्कों का कहना है कि इस्लाम में शहादत की आस्था वह चीज़ है जो हिज़्बुल्लाह और फिलिस्तीन के संघर्षकर्ता गुटों के हौसलों के बुलंद होने का मुख्य कारण है। क्योंकि न केवल संघर्षकर्ता गुटों बल्कि फिलिस्तीन और लेबनान के मुसलमान लोगों का मानना है कि अगर वे अतिग्रहणकारियों से जंग की हालत में मारे जाते हैं तो वे शहीद होते हैं और शहीद महान ईश्वर के पास ज़िन्दा है और उसका महान ईश्वर के निकट एक विशेष स्थान है।

दूसरे शब्दों में हिज्बुल्लाह और फिलिस्तीन के संघर्षकर्ता गुट मरने को अंत नहीं समझते हैं जबकि इस्राईली और जायोनी सैनिक इस दुनिया को सब कुछ समझते हैं और मरने से डरते हैं यही वजह है कि जब इस्राईली मारे जाने लगते हैं तो वे यथाशीघ्र समझौता करने के प्रयास में लग जाते हैं।

अभी हाल ही में जायोनी शासन ने फिलिस्तीनी गुटों के साथ 24घंटे के अंदर जो युद्धविराम कर लिया था उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। वास्तविकता यही है कि इस्राईल की सैनिक शक्ति मकड़ी के जाले से भी कमज़ोर है और यह वह बात है जिसे हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद नसरुल्लाह ने कई साल पहले कही थी और आज जायोनी सैनिकों को जिन हारों का सामना करना पड़ रहा है उससे सैयद हसन नसरुल्लाह की बातों की सच्चाई की पुष्टि होती है। MM