मिस्र-इस्राईल संबंधों में विस्तार
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ज़ायोनी शासन के विदेश मंत्रालय में मध्यपूर्व विभाग की प्रमुख अवीवा शैख़तार 23 मई को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ दो दिवसीय दौरे पर मिस्र की राजधानी क़ाहेरा पहुंची जहां मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात का उनका कार्यक्रम था।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
May २५, २०१६ १९:२१ Asia/Kolkata

ज़ायोनी शासन के विदेश मंत्रालय में मध्यपूर्व विभाग की प्रमुख अवीवा शैख़तार 23 मई को एक प्रतिनिधिमंडल के साथ दो दिवसीय दौरे पर मिस्र की राजधानी क़ाहेरा पहुंची जहां मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात का उनका कार्यक्रम था।

मिस्र में हुस्नी मुबारक के पतन के बाद मिस्र-इस्राईल ने संबंध में दो अलग अलग दौर का अनुभव किया। सितंबर 2011 में क़ाहेरा में इस्राइली दूतावास पर प्रदर्शनकारियों के हमले और इस दूतावास के अतिग्रहण के कारण इस्राइली राजदूत को क़ाहेरा से निकलना पड़ा। इस घटना के बाद ज़ायोनी शासन से मिस्र के संबंध समाप्त हो गए यहां तक कि उसे अपनी सुरक्षा पर अरबों के विरोध के प्रभाव की चिंता सताने लगी। यही कारण था कि मिस्र के क़ानूनी राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी के ख़िलाफ़ सैन्य विद्रोह से सबसे ज़्यादा इस्राईल प्रसन्न हुआ और इस विद्रोह के नतीजे में इस्राईल के साथ मिस्र के संबंध में जो बदलाव आया उससे यह स्पष्ट हुआ कि ज़ायोनियों की प्रसन्नता अकारण नहीं थी।  

इस्राईल ने मिस्र में सीसी के सत्ता में पहुंचने के सिर्फ़ 15 महीने बाद सितंबर 2015 में क़ाहेरा में अपना दूतावास फिर से खोल दिया।

इस्राईल और मिस्र की मौजूदा सरकार के बीच एक संयुक्त बिन्दु यह है कि दोनों ही इख़्वानुल मुस्लेमीन के ख़िलाफ़ हैं। मिस्री सरकार ने इख़्वानुल मुस्लेमीन को आतंकवादी संगठन घोषित किया और उसके इस फ़ैसले का इस्राईल ने समर्थन किया। इस्राईल ने सीना प्रायद्वीप की अशांति के लिए इख़्वानुल मुस्लेमीन को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश की। मिस्री सरकार ने भी इस्राईल के हितों और ग़ज़्ज़ा की नाकाबंदी जारी रहने की नीति का समर्थन करते हुए रफ़ह पास को बंद कर दिया ताकि ग़ज़्ज़ा की जनता पर दबाव बढ़े।

मिस्री राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह सीसी ने, स्वशासित फ़िलिस्तीनी प्रशासन-ज़ायोनी शासन के बीच साठगांठ वार्ता को फिर से शुरु करने की योजना पेश की, जिसका ज़ायोनी प्रधान मंत्री ने स्वागत किया।

मिस्री सरकार ने ऐसी स्थिति में इस्राईल के साथ संबंध मज़बूत करने की नीति अपना रखी है जब मिस्री जनता सहित इस देश के बहुत से कार्यकर्ता क़ाहेरा की इस नीति का विरोध कर रहे हैं और इसे ‘इस्राईल के साथ अस्वीकार्य दोस्ती’ कह रहे हैं। (MAQ/T)