इस्राईल में लेबनान पर हमले का साहस नहीं हैः हिज़्बुल्लाह
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के उप महासचिव ने 33 दिवसीय युद्ध को ज़ायोनी शासन के 17 वर्षों के डर का कारण और इसके परिणाम स्वरूप युद्ध के बाद के वर्षों में इस शासन को लेबनान पर आक्रमण करने से परहेज़ करने का कारण क़रार दिया।
ज़ायोनी सेना और लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के बीच 33 दिवसीय युद्ध जुलाई 2006 में शुरू हुआ और उसी वर्ष 14 अगस्त को हिज़्बुल्लाह की जीत के साथ समाप्त हो गया। लेबनान के साथ 33 दिनों तक चले युद्ध में ज़ायोनी शासन हार और भारी नुकसान झेलने के बाद इस युद्ध से पीछे हटने पर मजबूर हो गया।
हिजबुल्लाह के उप महासचिव शैख़ नईम क़ासिम ने कहा कि 33 दिनों के युद्ध में जीत ने न केवल एक मज़बूत लेबनान का समीकरण बनाया बल्कि क्षेत्र में इसके प्रतिरोध और जीत का समीकरण भी बनाया।
शैख़ नईम क़ासिम ने प्रतिरोध के विस्तार में हिज़्बुल्लाह की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हुई घटनाओं की जांच से हमें पता चलता है कि हिज़्बुल्लाह प्रतिरोध के शिखर पर पहुंचने और लेबनान में इसकी प्रतिभा के विस्तार तथा फ़िलिस्तीन, सीरिया, इराक़, यमन और पूरी दुनिया में प्रतिरोध की संस्कृति की उपस्थिति का कारण बना है।
शैख़ नईम क़ासिम ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि इस्राईल, हिज़्बुल्लाह के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता, ज़ोर दिया कि ज़ायोनी शासन लेबनान पर आक्रमण का साहस नहीं कर सकता है क्योंकि वह जानता है कि हिज़्बुल्लाह ने पहले से ही किसी भी आक्रमण का जवाब तैयार रखा है। (AK)
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