अंतरराष्ट्रीय मस्जिद डे
आज 21 अगस्त है, अंतरराष्ट्रीय मस्जिद डे। 21 को अंतरराष्ट्रीय मस्जिद डे के तौर पर मनाने का कारण 56 साल पहले अल-अक्सा मस्जिद में घटने वाली घटना है, जो मुसलमानों का पहला क़िबला है।
21 अगस्त, 1969 को सुबह सात बजे, डेनिस माइकल विलियम रोहन नामक एक चरमपंथी ज़ायोनी ने तत्कालीन सरकार द्वारा समर्थित एक योजनाबद्ध कार्रवाई के आधार पर अल-अक्सा मस्जिद को आग लगा दी थी। इस आतंकवादी कार्रवाई के परिणामस्वरूप, मस्जिद का 1,500 वर्ग मीटर हिस्सा जल गया था।
इस आपराधिक कृत्य में, मस्जिद के तीन बरामदे और उनकी नींव और मेहराब और मुख्य नींव जिस पर मस्जिद का गुंबद स्थित था, जल गए थे। मस्जिद की छत ढह गई थी। इसकी सजावट को नष्ट कर दिया गया था और मस्जिद के अंदर लकड़ी के गुंबद के कुछ हिस्से, मेहराब, क़िबला दीवार, मस्जिद के अंदर लगे संगमरमर, प्लास्टर और रंगीन कांच से बनी खिड़कियां, क़ालीन, मेहराब के ऊपर टाइलों पर सोने से लिखा हुआ क़ुरान का सूरा इत्यादि नष्ट हो गए थे।
आग पर क़ाबू पाने के बाद ज़ायोनी शासन ने अल-अक्सा मस्जिद में लगी आग के लिए एक ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक को ज़िम्मेदार ठहराया और इस पर्यटक को गिरफ्तार कर तेल अवीव में दिखावटी ट्रायल आयोजित करने के बाद, इस ज़ायोनी को मानसिक रूप से बीमार घोषित कर रिहा कर दिया।
1967 के 6-दिवसीय युद्ध में वेस्ट बैंक के साथ ही ज़ायोनी शासन ने अल-क़ुद्स के पूर्वी हिस्से पर भी क़ब्जा कर लिया। उसके बाद ज़ायोनी अधिकारियों ने अल-अक्सा मस्जिद को नष्ट करने की साज़िश रची। अल-अक्सा मस्जिद को नष्ट करने का उद्देश्य इसके स्थान पर एक यहूदी टैम्पल के निर्माण के लिए आधार तैयार करना था। जिसके लिए चरमपंथी ज़ायोनी अभी भी प्रयास कर रहे हैं। नेतनयाहू के नेतृत्व में अब तक की सबसे कट्टरपंथी और चरमपंथी सरकार के गठन के बाद, इस पर काम तेज़ कर दिया गया है।
इस आग की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 1969 में बैठक की और प्रस्ताव 271 पारित किया, जिसमें इस्राईल की निंदा की गई। इस्लामी देशों में लोगों ने ज़ायोनी शासन और उसके पश्चिमी समर्थकों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। इस्लामी देशों ने भी कार्यवाही की और इस्लामी जगत और इस्लामी मान्यताओं को पेश आने वाले ख़तरों से निपटने के लिए इस्लामी कॉन्फ्रेंस संगठन का गठन किया।
अल-अक्सा मस्जिद को इस्लाम में बहुत पवित्र माना जाता है और यह मुसलमानों का तीसरा सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। ज़ायोनी शासन ने अल-अक्सा मस्जिद को नष्ट करने की एक रणनीति अपना रखी है। इस लक्ष्य को वह एक रणनीति के रूप में हासिल करना चाहता है। इसे नुकसान पहुंचाने के लिए वह हर संभव अवसर का लाभ उठाना चाहता है।